तिहाड़ जेल से रिहाई के बाद भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने शुक्रवार को कहा कि राजनीतिक पार्टी के बारे में वह बाद में निर्णय लेंगे क्योंकि फिलहाल सीएए जैसे ‘काले कानून’ के खिलाफ लड़ाई लड़नी है.

चंद्रशेखर आजाद ने ‘इंडियन वूमेन प्रेस कोर’ में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनके संगठन की ओर से संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी. उन्होंने कहा, ‘सरकार काला कानून लाई है. मैं बताना चाहता हूं कि कोई कहीं नहीं जाएगा. सब यहीं रहने वाले हैं.’ यह पूछे जाने पर कि वह राजनीतिक पार्टी का गठन कब करेंगे तो उन्होंने कहा, ‘यह बाद में होगा. पहले हमें इस काले कानून के खिलाफ लड़ाई लड़नी है. इस कानून के खिलाफ लोगों को एकजुट करेंगे.’ आजाद ने एक तरह से उन अटकलों पर भी विराम लगा दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि वह दिल्ली विधानसभा चुनाव में उतर सकते हैं.

तिहाड़ जेल से रिहा होने के कुछ ही घंटे बाद भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद जामा मस्जिद भी पहुंचे. चंद्रशेखर आजाद ने जामा मस्जिद पहुंचकर संविधान की प्रस्तावना पढ़ी और संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को निरस्त करने की मांग की. उन्होंने शाहीन बाग, जामिया मिल्लिया इस्लामिया और देश के अन्य हिस्सों में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) विरोधी प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए महिलाओं की तारीफ की. जामा मस्जिद जाने से पहले वह गोल मार्केट के पास महर्षि वाल्मीकि मंदिर और गुरुद्वारा बंगला साहिब भी पहुंचे.

दिल्ली की एक अदालत ने चंद्रशेखर आजाद को बुधवार को जमानत दी थी. उन पर 20 दिसंबर को सीएए के विरोध में प्रदर्शन के दौरान जामा मस्जिद के पास लोगों को भड़काने का आरोप है. अदालत ने उन्हें जमानत देते समय यह शर्त भी लगाई है कि उन्हें चार सप्ताह तक दिल्ली से दूर रहना होगा. अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि सहारनपुर जाने से पहले आजाद अगर 24 घंटे के भीतर जामा मस्जिद सहित दिल्ली में कहीं जाना चाहते हैं तो पुलिस उनके साथ रहेगी.