केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) का विरोध कर रहे विपक्ष पर तीखा हमला किया है. उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों की आंखों पर वोट बैंक की पट्टी बंधी है. पीटीआई के मुताबिक सीएए के समर्थन में लखनऊ में आयोजित एक जागरूकता रैली में गृह मंत्री ने कहा कि यह नागरिकता छीनने का नहीं बल्कि देने का कानून है. अमित शाह का कहना था, ‘जिसको विरोध करना हो करे, मगर सीएए वापस नहीं होने वाला है.’ उन्होंने विपक्षी दलों को सीएए पर बहस की चुनौती भी दी. अमित शाह ने कहा, ‘सीएए के खिलाफ प्रचार किया जा रहा है कि इससे देश के मुसलमानों की नागरिकता चली जाएगी. मैं कहने आया हूं कि जिसमें भी हिम्मत है वह इस पर चर्चा करने के लिये सार्वजनिक मंच ढूंढ ले. हम चर्चा करने के लिये तैयार हैं.’

सीएए में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत आने वाले गैरमुस्लिमों को आसानी से नागरिकता देने का प्रावधान है. इसका देश के कई हिस्सों में तीखा विरोध हो रहा है. अमित शाह ने कहा कि सीएए की कोई भी धारा किसी भी नागरिक की नागरिकता नहीं लेती. उनका कहना था, ‘आज देश में इसके खिलाफ दंगा और धरना-प्रदर्शन कराया जा रहा है जो गलत है.’ गृह मंत्री ने आगे कहा कि भाजपा का सीएए के प्रति जनजागरण का अभियान इस कानून के खिलाफ दुष्प्रचार करके देश को तोड़ने की साजिश रचने वालों के खिलाफ मुहिम है.

अमित शाह ने सीएए का विरोध करने वाले कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर भी हमला किया. उन्होंने कहा, ‘जब पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में करोड़ों लोग धर्म के आधार पर मारे गये तब आप कहां थे? कश्मीर से पांच लाख पंडितों को विस्थापित किया गया, मगर इन दलों के मुंह से एक शब्द नहीं निकला. आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्षों से प्रताड़ित लोगों को अपने जीवन का नया अध्याय शुरू करने का मौका दिया है.’