सुप्रीम कोर्ट ने नए नागरिकता कानून पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है. उसका कहना है कि सरकार का पक्ष जाने बिना एकतरफा रोक नहीं लगाई जा सकती. उसने सरकार को इस पर जवाब देने के लिए चार हफ्ते का वक्त दिया है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि अब इस मामले की सुनवाई पांच सदस्यों की संविधान करेगी. इसके अलावा इंटरपोल ने स्वामी नित्यानंद के खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया है. बीते साल देश छोड़कर भाग चुके नित्यानंद पर बलात्कार का आरोप है. आज ज्यादातर अखबारों ने इन खबरों को पहले पन्ने पर जगह दी है.

सरकार एनपीआर से विवादित सवालों को हटा सकती है

गैर भाजपा शासित राज्यों के बढ़ते विरोध के बाद केंद्र सरकार राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) से विवादित सवालों को हटाने पर विचार कर रही है. दैनिक जागरण ने यह खबर दी है. अखबार के मुताबिक सरकार का मानना है कि यदि सभी गैर-भाजपा राज्यों ने एनपीआर के आंकड़े जुटाने से इन्कार कर दिया तो इस कवायद का पूरा उद्देश्य ही विफल हो जाएगा. केरल और पश्चिम बंगाल ने तो खुलकर एनपीआर का काम रोकने का ऐलान कर दिया है. उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार एनपीआर का पूरा उद्देश्य गरीबों की कल्याणकारी योजनाओं के लिए आंकड़े जुटाना है, ताकि हर जरूरतमंद को उसकी जरूरत के मुताबिक मदद की जा सके.

केंद्र सरकार की सुप्रीम कोर्ट से अपील, डेथ वारंट के सात दिन के भीतर दोषियों को फांसी हो

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दाखिल कर मांग की है कि फांसी की सजा पाए दोषियों की दया याचिका खारिज होने के बाद सात दिन के भीतर डेथ वारंट जारी कर दिया जाए और उसके बाद सात दिन के भीतर उन्हें फांसी दे दी जाए. सरकार की अपील है कि इस सजा पर उनके साथी सह अभियुक्तों की दया याचिका लंबित रहने का कोई असर नहीं पड़े. दैनिक भास्कर के मुताबिक गृह मंत्रालय ने न्याय का इंतजार करते दुर्दांत अपराध के पीड़ितों का हवाला देते हुए शीर्ष अदालत से इस बारे में दिशा-निर्देश तय करने का आग्रह किया है. इसे दिल्ली के निर्भया सामूहिक दुष्कर्म कांड के दोषियों के मामले को देखते हुए अहम माना जा रहा है. इस मामले के चारों दोषियों को सुप्रीम कोर्ट तक से फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है, लेकिन घटना के सात साल बीत जाने के बाद भी इस पर अब तक अमल नहीं हो सका है.

आंध्र प्रदेश में बड़ा जमीन घोटाला

आंध्र प्रदेश पुलिस ने एक बड़ा जमीन घोटाला उजागर करने का दावा किया है. द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक यह घोटाला नई राजधानी के रूप में विकसित किए जा रहे अमरावती में हुआ है. पुलिस का कहना है कि राज्य के कुछ बेहद गरीब लोगों को करोड़ों की जमीन का मालिक दिखाया गया है. मामले की जांच सीआईडी के पास है. उसके मुताबिक सफे़द राशन कार्ड रखने वाले 797 लोगों ने अमरावती में 2014 और 2015 में 220 करोड़ रुपये की जमीन ख़रीदी है. इन लोगों की मासिक आय 5000 रूपये से भी कम है और ज़मीन मालिकों के पास पैन कार्ड भी नहीं है. सीआईडी ने अब आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय से संभावित कर चोरी और सौदों में मनी लॉन्डरिंग की जांच के लिए कहा है.