‘डेमोक्रेसी इंडेक्स’ में भारत 10 स्थान नीचे खिसक गया है. 165 देशों की इस सूची में वह 51वें स्थान पर है. इससे पिछले साल भारत 41वें पायदान पर था. इस इंडेक्स को जानी-मानी अंतरराष्ट्रीय पत्रिका द इकॉनॉमिस्ट हर साल जारी करती है.

खबरों के मुताबिक शून्य से 10 तक के पैमाने पर भारत का स्कोर 7.23 से गिरकर इस बार 6.90 हो गया है. 2006 में इस रैंकिंग के वजूद में आने के बाद से यह देश का सबसे कम स्कोर है. इसकी मुख्य वजह नागरिक स्वतंत्रता में कटौती बताई जा रही है. इससे जुड़ी रिपोर्ट में कहा गया है कि कश्मीर से अनुच्छेद-370 निष्प्रभावी किए जाने, असम में एनआरसी पर काम शुरू होने और फिर संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) की वजह से नागरिकों में असंतोष बढ़ा है और इसीलिए भारत के स्कोर में कमी आई है.

वैसे नागरिक स्वतंत्रता के मामले में बाकी दुनिया का हाल भी भारत से खास जुदा नहीं है. वैश्विक डेमोक्रेसी स्कोर में भी गिरावट दर्ज की गई है. इस बार यह 5.44 है जो 2006 में इस रैंकिंग की शुरुआत के बाद इसका न्यूनतम स्तर है. इसकी वजह लैटिन अमेरिका और अफ्रीका में तमाम देशों में इस मोर्चे पर तेजी से बिगड़ते हालात को बताया जा रहा है.

जहां तक नागरिक स्वतंत्रता के मामले में शीर्ष पर रहने वाले देशों की बात है तो नॉर्वे इसमें पहले नंबर है. अमेरिका का स्थान 25वां हैं. उधर, भारत के पड़ोसी देशों की बात की जाए तो चीन 153, पाकिस्तान 108, नेपाल 92, बांग्लादेश 80 और श्रीलंका 69वें नंबर पर है.

इकनॉमिस्ट के मुताबिक दुनिया की करीब आधी आबादी किसी न किसी मामले में लोकतांत्रिक व्यवस्था में रहती है. करीब तीस फीसदी आबादी ऐसी है जहां नागरिक स्वतंत्रता को कोई तवज्जो नहीं दी जाती. इस आबादी का ज्यादातर हिस्सा चीन में रहता है. इसके अलावा करीब छह फीसदी आबादी ऐसी है जो पूर्ण लोकतंत्र में रह रही है. हालांकि यह आंकड़ा भी 2015 के मुकाबले तीन फीसदी गिर गया है.