लेखक-निर्देशक: रेमो डिसूजा

कलाकार: वरुण धवन, श्रद्धा कपूर, प्रभु देवा, नोरा फतेही, अपारशक्ति खुराना

रेटिंग: 2.5/5

‘स्ट्रीट डॉन्सर 3डी’ की समीक्षा से पहले ‘निष्काम – सिख वेलफेयर एंड अवेयरनेस टीम’ (एसडब्ल्यूएटी) पर दो बातें कर लेते हैं. निष्काम-एसडब्ल्यूएटी, लंदन में सिख समुदाय द्वारा बनाई गई एक चैरिटेबल संस्था है. यह आर्थिक रूप से अक्षम लोगों को उनके रहने-जीने की बुनियादी ज़रूरतें हासिल करने में उनकी मदद करती है. इस संस्था की सबसे खास बात यह है कि यह नशे और इमीग्रेशन से जुड़े मामलों में भी लोगों को सहायता उपलब्ध करवाती है और यह मदद कई लोगों के लिए जिंदगी बदलने वाली साबित हुई है. यहां पर निष्काम का जिक्र करना इसलिए ज़रूरी था क्योंकि ‘स्ट्रीट डांसर 3डी’ की कहानी का एक बड़ा हिस्सा इस संस्था के काम से प्रभावित है. लेकिन इससे ज्यादा कुछ भी कहना स्पॉइलर हो सकता है, इसलिए चलिए, अब फिल्म की बात करते हैं.

‘स्ट्रीट डांसर 3डी’ का लेखन और निर्देशन मशहूर कोरियोग्राफर रेमो डि’सूजा ने किया है. इससे पहले एबीसीडी और एबीसीडी-2 जैसी डांस फिल्में लेकर आने वाले रेमो अब इसकी तीसरी कड़ी लेकर आए हैं. हालांकि कुछ व्यावसायिक समीकरण बदलने के चलते वे फिल्म का टाइटल एबीसीडी-3 नहीं रख सके, लेकिन उन्होंने टाइटल में ‘3डी’ जोड़कर इसकी भरपाई करने की कोशिश की है. यानी इसका फिल्म के 3डी में बनाए जाने से कोई लेना-देना नहीं है.

फिल्म की कहानी पर आएं तो लंदन की गलियों में दो डांस ग्रुप अक्सर एक-दूसरे से भिड़ते दिखाई देते हैं जिनमें एक के सदस्य भारतीय हैं तो दूसरे के पाकिस्तानी. कहानी आगे बढ़ती है तो ये दोनों एक खास मकसद के लिए साथ आते हैं और जीत हासिल करते हैं (नहीं, यह स्पॉइलर नहीं है). एक ऐसे वक्त में, जब रोज़ाना पाकिस्तान का नाम लेकर नेता से लेकर मीडिया तक हाय-तौबा मचाते दिखते हों, एक ऐसी फिल्म देखना जिसमें भारत-पाकिस्तान मिलकर कुछ करते हैं, आपको थोड़ी खुशी देता है. लेकिन यह खुशी तब काफूर होती नज़र आती है जब फिल्म के पहले हिस्से में, नाचते-कूदते किरदारों के बीच कहानी की दशा और दिशा ज़रा भी समझ नहीं आती. सीधे से कहें तो किरदारों के इस लंबे परिचय के दौरान आप जमकर बोर होते हैं.

फिल्म का दूसरा हिस्सा शुरू होते ही यह खुशी, मनोरंजन नाम के सूद के साथ वापस लौटती है. हालांकि कहानी यहां पर भी बहुत सटीक नहीं है लेकिन टुकड़ों में जो भी मिलता है, वह कमाल है. कहा जा सकता है कि फिल्म का पहला हिस्सा जितना पकाऊ, उबाऊ और झिलाऊ है, दूसरा उतना ही चौंकाऊ और मज़ा दिलाऊ है. यहां पर प्रभु देवा के ‘मुकाबला’ से बेहतरीन डांस एक्ट्स का जो सिलसिला शुरू होता है, वह फिल्म के अंत तक जारी रहता है. और, यही ‘स्ट्रीट डांसर 3डी’ को पैसा वसूल बनाता है.

लेखन में चूकने वाले रेमो डि’सूजा के निर्देशन की बात करें तो उन्होंने अपनी इस फिल्म के एक-एक दृश्य को दर्शनीय बनाने के लिए कोई भी कोशिश बाकी नहीं रखी है. चाहे लोकेशंस हों या कॉस्ट्यूम या संगीत या फिर डांस मूव्स. यहां पर लॉकिंग-पॉपिंग, जैज़, स्लो-मोशन, कंटेम्पररी यानी हर तरह की डांस विधा जो हिप-हॉप में फिट हो सकती है, अपने पूरे शबाब में हमें देखने को मिलती है. धर्मेश येलेनडे, सलमान खान, पुनीत पाठक, राघव जुयाल, सुशांत पुजारी जैसे वे सभी बेहतरीन डांसर इस फिल्म का हिस्सा हैं जो कभी टीवी रियलिटी शोज से मशहूर हुए थे. इनमें से पुनीत पाठक, बतौर अभिनेता भी खासा प्रभावित करते हैं और कलाकारों की इस भीड़ में दर्शनीय बने रहते हैं.

‘स्ट्रीट डांसर 3डी’ में मुख्य भूमिका निभा रहे वरुण धवन पर आएं तो वे इसमें कमाल के अभिनय के साथ कमाल का डांस भी दिखाते हैं. हालांकि यहां पर अभिनय की गुंजाइश थोड़ी ही थी, फिर भी वे अपने कॉमिक और सीरियस, दोनों ही तरह के मूड में देखने लायक काम करते हैं. वहीं, श्रद्धा कपूर अभिनय में तो थोड़ी कमतर लगती हैं लेकिन डांस में वे भी पूरी बीस ही नजर आती हैं. इनके अलावा, नोरा फतेही और अपारशक्ति खुराना भी फिल्म का हिस्सा हैं. नोरा जहां अपने डांस मूव्स से फिल्म में केवल थोड़ी हॉटनेस बढ़ाने के काम आती हैं, वहीं अपने छोटे से रोल में अपारशक्ति का बेहतरीन अभिनय उन्हें और देखे जाने की इच्छा बनाए रखता है.

लेकिन एक शख्स जो पटकथा सहित फिल्म की तमाम कमियों को बड़ी आसानी से ढक लेता है, वह है प्रभु देवा. अपने मशहूर गाने ‘मुकाबला’ से ढेर सारा नॉस्टैल्जिया जगाने वाले देवा एक बार फिर यकीन दिलाते हैं, डांस के मामले में वे प्रभु ही हैं. दिलचस्प है कि सैकड़ों कमाल के हिप-हॉप डांसर की मौजूदगी में भी जिस कोने पर वे थिरकते होते हैं, नज़र वहीं पर होती है. डांस के अलावा जिन दृश्यों में वे ज़रा कॉमिक मिज़ाज दिखाते हैं, उनमें न के बराबर अभिनय करते हुए भी वे बुरे नहीं लगते. इंटरवल के बाद वे जिस तरह का कमाल रचते हैं, इस फिल्म को केवल उनके लिए ही देखा जा सकता है और देखा जाना चाहिए.

‘स्ट्रीट डांसर 3डी’ के कुछ और पक्षों पर बात करें तो यह फिल्म 3डी में बनाई गई है लेकिन ऐसा किए जाने से फिल्म के एक्सपीरियंस में कोई खास फर्क पड़ता नहीं दिखाई देता है. संगीत पर आएं तो इसके क्लबसॉन्गनुमा गाने न सिर्फ फिल्म में सटीक बैठते हैं बल्कि एक के बाद एक बजते रहने के बावजूद कान लगाने लायक बने रहते हैं. खास तौर पर, ‘मिले-सुर मेरा तुम्हारा’ का रीमिक्स वर्जन जितना सुरीला रचा गया है और फिल्म में जिस तरह से इस्तेमाल किया गया है, वह इसके असर और नॉस्टैल्जिया दोनों को दोगुना कर देता है. पिछली फिल्मों से तुलना करें तो कहानी की सीक्वेंसिंग से लेकर डांस की अति तक, सबकुछ यहां पुराने मिज़ाज का ही है. फिर भी कहा जा सकता है कि कम कहानी और ज्यादा नाच वाली ‘स्ट्रीट डांसर 3डी’ जितना पकाती है, उतना ही खुश भी करती है, इसलिए इसे एक बार तो देखा ही जा सकता है.