भारत ने कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता की अमेरिकी पेशकश को फिर खारिज कर दिया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि इस मसले पर भारत का रुख एकदम साफ रहा है. उनके मुताबिक कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है. इस खबर को आज कई अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. इसके अलावा बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार ने पार्टी महासचिव पवन वर्मा द्वारा उन्हें लिखी एक चिट्ठी सार्वजनिक किए जाने पर नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा कि पवन वर्मा को जहां जाना हो वहां चले जाएं. इस चिट्ठी में जेडीयू महासचिव ने पार्टी द्वारा दिल्ली में भाजपा के साथ गठबंधन पर नाराजगी जताई थी. यह खबर भी कई अखबारों की प्रमुख सुर्खियों में शामिल है.

फांसी के मामले में अंतहीन मुकदमेबाजी नहीं चलेगी : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा के एक मामले में अहम टिप्पणी की है. दैनिक जागरण के मुताबिक शीर्ष अदालत ने कहा है कि इस सजा में फाइनैलिटी (सजा का अंतिम होना) बेहद जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि मृत्युदंड में अंतहीन मुकदमेबाजी की इजाजत नहीं दी जा सकती. मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने यह टिप्पणी फांसी की सजा पाए अमरोहा कांड के दोषी सलीम और उसकी प्रेमिका शबनम की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के दौरान की. यह टिप्पणी निर्भया कांड के चारों दोषियों के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है जिन्हें अभी तक फांसी नहीं हो पाई है. निचली अदालत उन्हें फांसी देने के लिए एक फरवरी की तिथि भी तय कर चुकी है लेकिन दोषी मामले में देरी करने के लिए एक-एक कर अर्जी दाखिल कर रहे हैं.

370 पर फैसला बदला नहीं जा सकता : केंद्र

केंद्र सरकार ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी करने के फैसले को वापस लेना मुमकिन नहीं है. दैनिक भास्कर के मुताबिक उसका यह भी कहना था कि अब इस बदलाव को स्वीकार करने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं. सरकार ने यह बात इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कही. केंद्र ने इस तर्क का भी जोरदार तरीके से विरोध किया कि जम्मू-कश्मीर का भारत के साथ विलय नहीं हुआ था. सरकार ने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता तो फिर अनुच्छेद 370 की आवश्यकता ही नहीं पड़ती. उसने अपने इस फैसले की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सात जजों की बड़ी पीठ को सौंपने की मांग का भी विरोध किया. उधर, पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने इस पर फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा कि वह इस पर विस्तृत आदेश पारित करेगी.

असम में 644 उग्रवादियों का आत्मसमर्पण

असम में आठ प्रतिबंधित संगठनों के 644 उग्रवादियों ने 177 हथियारों के साथ गुरुवार को आत्मसमर्पण कर दिया. हिंदुस्तान ने यह खबर दी है. पुलिस ने बताया कि इनमें उल्फा (आई), एनडीएफबी, आरएनएलएफ, केएलओ, भाकपा (माओवादी), एनएसएलए, एडीएफ और एनएलएफबी के सदस्य शामिल हैं. इस मौके पर असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल भी मौजूद थे. पुलिस महानिदेशक ज्योति महंता ने पत्रकारों से कहा कि राज्य के लिए और असम पुलिस के लिए यह एक महत्वपूर्ण दिन है. सरकार की शांति पहल के तहत इन उग्रवादियों को मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा.