बीएसएफ ने कहा है कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के लागू होने के बाद पिछले करीब एक महीने में स्वदेश लौटने वाले अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की संख्या में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. उसके मुताबिक इसकी वजह संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के क्रियान्वयन के बाद अवैध प्रवासियों के बीच डर हो सकता है. पीटीआई के मुताबिक बीएसएफ के महानिरीक्षक (साउथ बंगाल फ्रंटियर) वाईबी खुरानिया का कहना था, ‘पिछले एक महीने में सीमावर्ती देश जाने वाले अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है.... हमने केवल जनवरी में 268 अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को पकड़ा जिनमें से अधिकतर लोग पड़ोसी देश जाने की कोशिश कर रहे थे.’

सीएए में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले गैरमुस्लिमों को आसानी से भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है. लेकिन इसका तीखा विरोध हो रहा है. बीते महीने देश के अलग-अलग हिस्सों में यह विरोध हिंसा में तब्दील हो गया जिसमें कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई. अभी भी दिल्ली के शाहीन बाग सहित देश के कई इलाकों में इस कानून के खिलाफ धरना-प्रदर्शन जारी है. केरल और पंजाब जैसे राज्य सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर चुके हैं तो पश्चिम बंगाल ऐसा करने की तैयारी में है. उधर, केंद्र सरकार का कहना है कि राज्यों को ऐसा करने का अधिकार नहीं है क्योंकि नागरिकता का विषय उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता.

विपक्ष ने सीएए को भारत की आत्मा पर हमला बताया है. उसका यह भी कहना है कि यह कानून भारतीय संविधान के खिलाफ है. उधर, इस आरोप को खारिज करते हुए सरकार का कहना है कि कानून जारी रहेगा. कल लखनऊ में आयोजित एक रैली में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जिसे जितना विरोध करना हो करे लेकिन सीएएस वापस नहीं होने वाला. उन्होंने इस मुद्दे पर हो रहे विरोध को विपक्ष के दुष्प्रचार का नतीजा भी बताया.

यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंच गया है. अदालत ने इस मुद्दे पर सरकार को जवाब देने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने सीएए पर अंतरिम रोक लगाने से भी इनकार कर दिया है. उसने कहा कि अब इस पर फैसला भी संविधान पीठ ही करेगी.

सीएए के खिलाफ शीर्ष अदालत में कुल 143 याचिकाएं दायर की गई हैं. इनमें केरल सरकार की याचिका भी शामिल है जिसमें इस कानून को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है. केंद्र ने भी एक याचिका दायर की है जिसमें सीएए के खिलाफ अलग-अलग अदालतों में दायर की गई याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग की गई है.