नेपाल ने कहा है कि अगर भारत बांग्लादेश के साथ सीमा विवाद सुलझा सकता है तो उसके साथ क्यों नहीं? शुक्रवार को काठमांडू में एक पत्रकार सम्मेलन में भारतीय पत्रकारों से बातचीत के दौरान नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावली ने यह बात कही.

पीटीआई के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘अनसुलझे मुद्दे का बोझ लेकर आगे नहीं बढ़ना चाहिए क्योंकि दोनों देशों और उनके नेताओं के बीच समझ का स्तर सबसे ऊपर है. जहां चाह वहां राह और मेरा विश्वास है कि समस्याओं को सुलझाने की इच्छाशक्ति है.’

भारत के साथ कालापानी और सीमा की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मुख्य मुद्दा दोनों देशों को अतीत से मिला बोझ है.

ग्यावली का कहना था कि नेपाल की मौजूदा सीमा का निर्धारण 1816 की सुगौली संधि से हुआ था और इसके बाद 1816, 1860 और 1875 में अनुपूरक संधियां हुईं.

उनके मुताबिक संधि से जुड़े तीन और समझौते हैं जिसमें विशेष रूप से कहा गया है कि नेपाल की पश्चिमी सीमा का सीमांकन काली नदी से होगा, इसलिए ऐतिहासिक सबूत, दस्तावेज और मानचित्र काली नदी (नेपाल में महाकाली) को नेपाल की पश्चिमी सीमा के रूप में अंकित करते हैं.

विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावली ने आगे कहा, ‘यही वजह है कि नेपाल अनसुलझे और लंबित मुद्दों को सुगौली संधि और उस समय के अन्य पत्राचार, ऐतिहासिक मानचित्र और सबूतों के आधार पर सुलझाना चाहता है....मेरा मानना है कि दोनों देशों में मजबूत राजनीतिक स्थिरता है, नेता दूरदर्शी हैं और नेताओं के अच्छे निजी संबंध हैं. वे लंबित मुद्दों को राजनीतिक प्रक्रिया से सुलझाने को प्रतिबद्ध हैं.’

इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि नेपाल ने अपनी चिंता से पहले ही भारत को अवगत करा दिया है और वह लंबित मामलों को चर्चा के जरिये सुलझाने को तैयार है.

बीते नवंबर में भारत ने नए केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के गठन के बाद अपना नया मानचित्र जारी किया था. इसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को जम्मू-कश्मीर का हिस्सा और गिलगित बाल्टिस्तान को लद्दाख का हिस्सा दिखाया गया है.

इस मानचित्र के सामने आने के बाद नेपाल ने दावा किया कि लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी इलाके भारत में दिखाए गए हैं जबकि ये नेपाल के संप्रुभ क्षेत्र हैं. वहीं भारत का कहना है कि नया मानचित्र बिल्कुल सही है और उसमें देश के संप्रभु क्षेत्र को दिखाया गया है और इसलिए नेपाल के साथ सीमा की समीक्षा का सवाल ही नहीं उठता.