भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि मौद्रिक नीति की अपनी सीमाएं होती है और सरकार को चाहिए कि वह ढांचागत सुधारों और वित्तीय उपायों पर जोर दे. उनके मुताबिक ऐसा करने से ही मांग बढ़ेगी और प्रगति की रफ्तार भी. शक्तिकांत दास ने ये बातें दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज में एक आयोजन के दौरान कहीं. रिजर्व बैंक के मुखिया ने कहा कि फूड प्रोसेसिंग, पर्यटन, ई कॉमर्स और स्टार्ट अप जैसे कई क्षेत्र हैं जो विकास को गति दे सकते हैं.

शक्तिकांत दास का यह बयान आम बजट से करीब हफ्ते भर पहले आया है. केंद्रीय बैंक ने पिछले एक साल में रेपो रेट में लगातार कमी की है. इसके बावजूद विकास दर कम होती जा रही है. आईएमएफ ने हाल में अपने नए अनुमान में इस वित्त वर्ष के लिए भारत की विकास दर का अनुमान घटाकर 4.8 कर दिया है. उसके मुताबिक देश में घरेलू मांग में भी तीखी गिरावट आई है. आईएमएफ के मुताबिक भारतीय अर्थव्यवस्था की सुस्ती दुनिया पर भी असर डाल रही है.

इससे पहले चर्चित रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भी भारत का विकास दर का अनुमान घटा दिया था. यही नहीं, मोदी सरकार के आर्थिक सलाहकार रहे अरविंद सुब्रमण्यम ने तो यहां तक कह दिया था कि भारतीय अर्थव्यवस्था आईसीयू की तरफ बढ़ रही है.