‘कुछ लोग अभी भी मताधिकार के महत्व को नहीं समझ पाये हैं.’

— रामनाथ कोविंद, राष्ट्रपति

रामनाथ कोविंद ने यह बात राष्ट्रीय मतदाता दिवस के मौके पर कही. उन्होंने कहा कि जबकि तमाम देशों में मताधिकार के लिये लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ा, वहीं भारत में यह अधिकार संविधान लागू किये जाने के साथ ही देश के सभी नागरिकों को मिल गया था. राष्ट्रपति ने यूरोप सहित अन्य देशों की अपनी यात्राओं का जिक्र करते हुये कहा कि विश्व समुदाय में भारत की लोकतांत्रिक निर्वाचन प्रणाली विश्वसनीय होने के कारण इसे सम्मान की नजर से देखा जाता है.

‘आपको भाजपा समर्थकों से पूछना चाहिए कि पांच साल उनके बच्चों की पढ़ाई का ख्याल किसने रखा.’  

— अरविंद केजरीवाल, दिल्ली के मुख्यमंत्री

अरविंद केजरीवाल ने यह बात केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एक भाजपा समर्थक के घर जाने पर कटाक्ष करते हुए कही. अमित शाह ने ट्विटर पर दो तस्वीरें साझा की थीं जिनमें वह भाजपा के एक समर्थक के घर में दिख रहे थे. अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘आपको भाजपा समर्थकों से पूछना चाहिए कि पांच साल उनके लिए 24 घंटे बिजली किसने दी, जब आपने इतनी महंगाई कर दी तो उनके बिजली, पानी और बस यात्रा नि:शुल्क करके किसने उन्हें गले लगाया? ये सब मेरे परिवार के लोग हैं सर, मैंने इनका बड़ा बेटा बनकर ख्याल रखा है.’


‘मेरे ख्याल से सरकार को डर है कि उसका भांडा फूट जाएगा.’  

— शरद पवार, एनसीपी मुखिया

एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने आरोप लगाया है कि केंद्र ने भांडाफोड़ होने के डर से भीमा कोरेगांव हिंसा मामले की जांच को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपी है. उन्होंने कहा कि अन्याय के खिलाफ बोलना नक्सलवाद नहीं है. पुणे पुलिस के मुताबिक, 31 दिसंबर 2017 को पुणे में एल्गार परिषद का सम्मेलन हुआ था जिसे माओवादियों का समर्थन प्राप्त था. पुलिस का यह भी कहना था कि इस कार्यक्रम में भड़काऊ भाषण दिए गए थे जिस वजह से अगले दिन जिले के कोरेगांव भीमा युद्ध स्मारक पर हिंसा हुई. केंद्र ने शुक्रवार को इस मामले की जांच एनआईए को सौंप दी. इससे एक दिन पहले उप मुख्यमंत्री अजित पवार और राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मुंबई में बैठक की थी और इस मामले की समीक्षा कही थी.