1- सड़क से संसद तक विरोध का सबब बने नए नागरिकता कानून (सीएए) पर अंतरिम रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने इन्कार कर दिया है. द प्रिंट हिंदी पर अपने इस लेख में योगेंद्र यादव मानते हैं कि भारतीय गणतंत्र को बचाने की लड़ाई अब अदालत और संसद के किले या फिर ऐसी ही किसी प्रतिष्ठानी जगह से नहीं लड़ी जा सकेगी. उनके मुताबिक लोकतांत्रिक और अहिंसात्मक तरीका अपनाते हुए लड़ाई को अब सड़कों तक खींच लाना होगा.

सीएए पर सुप्रीम कोर्ट के सामान्य नज़रिये से लगता है, भारतीयों को वापस सड़क पर उतरने की जरूरत है

2-आर्थिक मोर्चे पर मोदी सरकार के लिए मुश्किलों का दौर जारी है. इस बीच जल्द ही आम बजट भी पेश होने वाला है. न्यूजलॉन्ड्री हिंदी पर अपने इस लेख में विवेक कौल मानते हैं कि अर्थव्यवस्था मौजूदा संकट से बाहर तभी निकल सकती है जब इसके 90 फीसदी निजी क्षेत्र में जान फूंकी जाए.

बजट 2020: मंदी से निकलना है तो सरकार को जेब ढीली करनी होगी

3-मक्खियां, मच्छर और तमाम दूसरे कीड़े-मकोड़े हमारे लिए गुस्से और झुंझलाहट का सबब होते हैं. हम उन्हें मारने के तमाम इंतजाम भी करते हैं. लेकिन बीबीसी के इस लेख के मुताबिक आगे से जब भी आप ऐसा करने वाले हों तो आपको दो बार सोचना चाहिए, क्योंकि कीड़ों की आबादी दुनिया भर में तेज़ी से कम हो रही है.

दुनिया से कीड़े ख़त्म हो जाएं तो क्या होगा?

4-चीन में कोरोना वायरस के कहर ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है. अब तक इससे 56 लोगों की मौ हो गई है. चीन अब तक अपने पांच शहरों को पूरी तरह सील कर चुका है ताकि इस वायरस को फैलने से रोका जा सके. उधर, बाकी देशों ने भी एहतियाती उपाय करने शुरू कर दिए हैं. क्या है यह कोरोना वायरस और इससे कैसे बचा जा सकता है? डॉयचे वेले पर अलेक्जांडर फ्राएंड की रिपोर्ट.

जानलेवा कोरोना वायरस की हर वो बात जो जानना जरूरी है

5-निर्भया मामले के दोषियों की सजा का दिन नजदीक आ रहा है. उन्हें एक फरवरी को फांसी दी जानी है. इस बीच चारों दोषी इससे बचने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं. एनडीटीवी खबर पर अपनी इस टिप्पणी में प्रियदर्शन मानते हैं कि बहुत सारे उत्साही लोग निर्भया के मामले में फांसी-फांसी की ऐसी रट लगाए हुए हैं जिससे न्याय का बुनियादी औचित्य ही क्षतिग्रस्त होता नजर आता है.

निर्भया के इंसाफ़ की गरिमा बनाए रखें- उसे जल्दबाज़ी भरे प्रतिशोध में न बदलें