आंध्र प्रदेश में कैबिनेट ने एक अहम फैसला किया है. उसने एक प्रस्ताव पारित कर राज्य विधान परिषद को समाप्त करने की प्रक्रिया को हरी झंडी दिखा दी है. पीटीआई के मुताबिक इस तरह का प्रस्ताव विधानसभा में भी लाया जाएगा और फिर इसे आवश्यक कार्यवाही के लिए केंद्र के पास भेजा जाएगा.

आंध्र प्रदेश की 58 सदस्यीय विधान परिषद में वाईएसआर कांग्रेस नौ सदस्यों के साथ अल्पमत में है. इसमें विपक्षी तेलगु देशम पार्टी के 28 सदस्य हैं. सत्तारुढ़ पार्टी सदन में साल 2021 में ही बहुमत प्राप्त कर पाएगी जब विपक्षी सदस्यों का छह साल का कार्यकाल खत्म हो जाएगा.

दरअसल वाईएस जगनमोहन रेड्डी की सरकार पिछले हफ्ते राज्य विधानसभा के उच्च सदन में राज्य में तीन राजधानियों से संबंधित महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करवाने में विफल रही थी. इसी के बाद राज्य मंत्रिमंडल ने यह कदम उठाया. ‘आंध्र प्रदेश विकेंद्रीकरण एवं सभी क्षेत्रों का समावेशी विकास विधेयक, 2020’ नाम के इस बिल में विशाखापट्टनम (विज़ाग) को प्रदेश की कार्यकारी राजधानी, अमरावती को विधायी राजधानी और कर्नूल को न्यायिक राजधानी बनाया जाना प्रस्तावित था. सूबे के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी का कहना है तीन राजधानियों के ज़रिए वे नीरू, निधुलु और परिपालना यानी पानी, राजकोष और प्रशासन पर किसी एक क्षेत्र के बजाय पूरे राज्य की एक समान दावेदारी सुनिश्चित करना चाहते हैं.