पश्चिम बंगाल ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया है. पीटीआई के मुताबिक प्रस्ताव में केंद्र सरकार से सीएए को रद्द करने के अलावा राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के क्रियान्वयन और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के अद्यतन की योजनाओं को निरस्त करने की अपील की गई है. राज्य के संसदीय कार्य मंत्री पार्थ चटर्जी ने सदन में यह प्रस्ताव पेश किया था. तीन राज्य– केरल, राजस्थान और पंजाब– नये नागरिकता कानून के खिलाफ प्रस्ताव पहले ही पारित कर चुके हैं.

यह कानून राज्य में सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के बीच तकरार का नया मुद्दा बन कर उभरा है. एक ओर जहां तृणमूल कांग्रेस इस विवादित कानून का पूरी ताकत के साथ विरोध कर रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा इसे लागू करने पर जोर दे रही है.

सीएए में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले गैरमुस्लिमों को आसानी से भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है. लेकिन इसका तीखा विरोध हो रहा है. बीते महीने देश के अलग-अलग हिस्सों में यह विरोध हिंसा में तब्दील हो गया जिसमें कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई. अभी भी दिल्ली के शाहीन बाग सहित देश के कई इलाकों में इस कानून के खिलाफ धरना-प्रदर्शन जारी है.

विपक्ष ने सीएए को भारत की आत्मा पर हमला बताया है. उसका यह भी कहना है कि यह कानून भारतीय संविधान के खिलाफ है. उधर, इस आरोप को खारिज करते हुए सरकार का कहना है कि कानून जारी रहेगा. गृह मंत्री अमित शाह कह चुके हैं कि जिसे जितना विरोध करना हो करे लेकिन सीएएस वापस नहीं होने वाला. उन्होंने इस मुद्दे पर हो रहे विरोध को विपक्ष के दुष्प्रचार का नतीजा भी बताया.

यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंच गया है. अदालत ने इस मुद्दे पर सरकार को जवाब देने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने सीएए पर अंतरिम रोक लगाने से भी इनकार कर दिया है. उसने कहा कि अब इस पर फैसला भी संविधान पीठ ही करेगी. सीएए के खिलाफ शीर्ष अदालत में कुल 143 याचिकाएं दायर की गई हैं. इनमें केरल सरकार की याचिका भी शामिल है जिसमें इस कानून को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है.