लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ यूरोपीय संसद में प्रस्ताव पेश किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है. पीटीआई के मुताबिक उन्होंने यूरोपीय संसद के प्रमुख डेविड मारिया सासोली को एक चिट्ठी लिखी है. इसमें उन्होंने कहा है कि किसी विधायिका द्वारा किसी अन्य विधायिका को लेकर फैसला सुनाना अनुचित है और इससे गलत परंपरा स्थापित होगी. ओम बिड़ला का यह भी कहना था कि इस परिपाटी का निहित स्वार्थ वाले लोग दुरुपयोग कर सकते हैं.

751 सदस्यीय यूरोपीय संसद में सीएए के खिलाफ पेश प्रस्तावों में कहा गया है कि यह कानून भारतीय नागरिकता प्रणाली में खतरनाक बदलाव को दिखाता है. ओम बिड़ला ने यूरोपीय संसद के अध्यक्ष को लिखा, ‘इस कानून में हमारे निकट पड़ोसी देशों में धार्मिक अत्याचार का शिकार हुए लोगों को आसानी से नागरिकता देने का प्रावधान है. इसका लक्ष्य किसी से नागरिकता छीनना नहीं है और इसे भारतीय संसद के दोनों सदनों में आवश्यक विचार-विमर्श के बाद पारित किया गया है.’

उधर, सीएए के खिलाफ यूरोपीय संसद में प्रस्तावित चर्चा और मतदान के बाद उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने भी कहा है कि भारत के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है. उनके मुताबिक वे ऐसे मामलों में विदेशी निकायों के हस्तक्षेप की प्रवृत्ति से चिंतित हैं जो पूरी तरह भारतीय संसद और सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं. उपराष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि भविष्य में इस तरह की कवायदों से बचा जाएगा.

इस मामले को लेकर भाजपा ने भी ईयू संसद के सदस्यों की निष्पक्षता पर सवाल उठाया है. भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने सीएए के खिलाफ प्रस्ताव का समर्थन करने वाले ईयू संसद के सदस्यों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इन सांसदों ने पाकिस्तान में हिंदू और सिख अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के खिलाफ कभी आवाज उठाई है.

उधर, कांग्रेस ने भाजपा पर नागरिकता मामले का अंतरराष्ट्रीयकरण करने का आरोप लगाया है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा, ‘सच्चाई यह है कि यूरोपीय संघ सीएए पर चर्चा कर रहा है. इस सरकार ने नागरिकता कानून का अंतरराष्ट्रीयकरण कर दिया है.’

इस बीच, यूरोपीय संघ (ईयू) के संस्थापक सदस्य देशों में शामिल फ्रांस का मानना है कि नया नागरिकता कानून (सीएए) भारत का एक आतंरिक राजनीतिक विषय है. फ्रांसीसी राजनयिक सूत्रों ने सोमवार को यह बात कही.

यूरोपीय संसद में सीएए के खिलाफ प्रस्तावों पर विदेश मंत्रालय से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. हालांकि, आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि सीएए पूरी तरह से भारत का आंतरिक विषय है.