दिल्ली में आठ फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए सत्ताधारी आम आदमी पार्टी और केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के प्रचार अभियान पूरी ताकत से चल रहे हैं. दोनों दलों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ आरोप-प्रत्यारोप और तीखे बयानों का दौर भी चल रहा है.

इन सबके बीच जमीनी स्तर पर दिल्ली चुनावों को देखने पर पता चलता है कि कुछ महीने पहले तक इन चुनावों में आप की दावेदारी जितनी मजबूत मानी जा रही थी, उतनी वह अभी नहीं है. जैसे-जैसे चुनाव अभियान आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे यह धारणा बन रही है कि भाजपा भी इन चुनावों में मुकाबले में आती जा रही है. लेकिन दिल्ली के कुछ विधानसभा क्षेत्रों में जाने पर पता चलता है कि भाजपा की मजबूत होती दावेदारी के बीच अभी भी आम आदमी पार्टी उससे काफी अधिक मजबूत है. इसके लिए प्रमुख तौर पर दो मुद्दे जिम्मेदार हैं.

दिल्ली के लोगों से बातचीत करने पर यह पता चलता है कि यहां जिस तरह से 200 यूनिट तक बिजली मुफ्त करने की योजना को आप ने लागू किया है, उससे पार्टी को काफी लाभ मिलने की उम्मीद है. दिल्ली परिवहन निगम की बसों में महिलाओं को मुफ्त सफर की सुविधा ऐसा ही एक और मुद्दा है. जमीनी स्तर पर लोगों से बातचीत करने पर पता चलता है कि ये दोनों मुद्दे आप के लिए इस बार के चुनावों में गेमचेंजर साबित हो रहे हैं.

दिल्ली के कुछ विधानसभा क्षेत्रों के लोगों से बातचीत करने पर यह भी पता चलता है कि शाहीन बाग में चल रहे विरोध-प्रदर्शन के बहाने दिल्ली में भी हिंदू-मुस्लिम एक मुद्दा है. लेकिन इसकी वजह से भाजपा को वह लाभ मिलता हुआ नहीं दिख रहा है जिसकी वह उम्मीद लगा रही है.

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में रहने वाले पंकज कुमार पेशे से वकील हैं. वे केजरीवाल सरकार से कई बातों पर असहमति तो दिखाते हैं लेकिन फिर भी उन्हें ही वोट देने की बात करते हैं. वे कहते हैं, ‘पिछले साल की सर्दियों के इन महीनों में आम तौर पर बिजली का बिल 1,400 रुपये से 1,500 रुपये के बीच आता था. लेकिन इस बार वो जीरो आ रहा है. इसका मतलब ये हुआ कि पिछले कुछ महीनों में मुझे औसतन डेढ़ हजार रुपये की बचत हो रही है. यानी कि मुफ्त बिजली की जो योजना केजरीवाल सरकार ने चलाई है, उसका सीधा लाभ न सिर्फ निचले तबके के लोगों को मिल रहा है बल्कि हमारे जैसे मध्य वर्ग के लोग भी इसका लाभ उठा रहे हैं.’

वे आगे कहते हैं, ‘कुछ लोग ऐसी योजनाओं से सरकारी खजाने पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ की बात करते हैं और कहते हैं कि ये सही नहीं हैं. लेकिन ऐसे लोगों को ये बात नहीं खटकती कि कॉरपोरेट घरानों को टैक्स छूट के नाम पर कितना लाभ दिया जाता है और इससे सरकारी खजाने पर कितना बोझ पड़ता है. सच्चाई ये है कि केंद्र सरकार से बेवजह टकराव की वजह से केजरीवाल सरकार की छवि जरूर खराब हुई है लेकिन बिजली के मोर्चे पर उसने जो काम किया है, उसका सीधा लाभ आम लोगों को मिल रहा है. जाहिर है कि इसका फायदा आम आदमी पार्टी को इन चुनावों में मिलेगा.’

तिमारपुर विधानसभा क्षेत्र के मतदाता संजीव शर्मा यहां अपनी एक छोटी सी राशन की दुकान चलाते हैं. 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली योजना से आप को होने वाले चुनावी लाभ के बारे में वे कहते हैं, ‘इससे हर महीने तकरीबन हजार रुपये की बचत मुझे हो रही है. मेरी बच्ची अभी चौथी कक्षा में पढ़ती है. इतने में उसके स्कूल की फीस निकल जाती है. जाहिर है कि मुझे इस स्कीम का सीधा लाभ मिल रहा है. मुझसे भी गरीब लोग हैं तिमारपुर विधानसभा क्षेत्र में. 200 यूनिट तक बिजली मुफ्त होने से उनके भी पैसे बच रहे हैं, उसका इस्तेमाल कोई पढ़ाई के लिए कर रहा है तो कोई दवाई के लिए. जाहिर है कि मुझ समेत जिन लोगों को भी इस योजना का सीधा लाभ मिल रहा है वे हिंदू-मुसलमान जैसे मुद्दों के बजाए इस मुद्दे को प्राथमिकता देते हुए फिर से अरविंद केजरीवाल को मुख्यमंत्री बनाने के लिए वोट देंगे.’

बिजली का बिल जीरो आना आप के लिए एक गेमचेंजर मुद्दा साबित होते हुए दिख रहा है, और इसी तरह का एक और मुद्दा डीटीसी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा है.

ओल्ड रजिंदर नगर में रूपा घरों में खाना बनाने का काम करती हैं. वे बगल के टोडापुर से ये काम करने सुबह-शाम आती हैं. डीटीसी में महिलाओं की मुफ्त यात्रा योजना के बारे में पूछे जाने पर वे कहती हैं, ‘मैं जहां रहती हूं, वहां से यहां आने का बस का किराया एक तरफ से 10 रुपये था. मैं सुबह आती हूं और काम करके दोपहर में लौट जाती हूं. फिर दोपहर बाद काम पर आती हूं और शाम को लौट जाती हूं. इस तरह से पूरे दिन में चार चक्कर लगता था और 40 रुपये बस के किराये में चला जाता था. इस तरह से देखें तो हर महीने मेरे तकरीबन 1,200 रुपये बच रहे हैं. बिजली बिल का भी पैसा बच रहा है. केजरीवाल सरकार की इन दोनों योजनाओं से मुझे सीधे-सीधे तकरीबन 2,000 रुपये का लाभ हर महीने हो रहा है. जाहिर सी बात है कि इससे मुझे बच्चों की पढ़ाई के खर्चे में सहूलियत हो रही है. यहां काम करने वाली अधिकांश महिलाओं से आप पूछेंगे तो इसी तरह का जवाब मिलेगा. ऐसे में हम लोग तो आप को ही वोट देंगे.’

डीटीसी बसों में महिलाओं की मुफ्त यात्रा से किस तरह मतदाताओं का निर्णय प्रभावित हो रहा है, इसे शाहदरा विधानसभा क्षेत्र की प्रीति गुप्ता से बातें करके समझा जा सकता है. दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक करने के बाद प्रीति ने कुछ महीने पहले करोल बाग की एक निजी कंपनी में काम करने की शुरुआत की है. वे कहती हैं, ‘मैं जिस बस से अपने ऑफिस आती हूं, उसमें एक तरफ का किराया मुझे 15 रुपये देना होता है. इस तरह से रोज 30 रुपये का खर्च बस के किराये में ही हो रहा था. छुट्टी के दिनों के खर्चों को हटा भी दें तो हर महीने सिर्फ ऑफिस जाने में होने वाला 800 रुपये का खर्च नहीं हो रहा है. इसके अलावा दूसरी जगह बस से जाने का खर्चा भी बच रहा है. इसी तरह से मेरी बहन के पैसे भी बच रहे हैं. जिस सरकार की योजना से हमें सीधा लाभ हो रहा है, अगर हम उसे वोट नहीं देंगे तो फिर भविष्य में कोई सरकार ऐसी योजना नहीं लाना चाहेगी.’