दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को निर्भया सामूहिक बलात्कार एवं हत्याकांड के चार मुजरिमों की मृत्यु के वारंट की तामील अगले आदेश तक स्थगित कर दी है. निर्भया कांड के दोषियों के वकील ने दलील दी थी कि जब एक अभियुक्त की अर्जी लंबित हो तो दूसरे को फांसी पर नहीं चढ़ाया जा सकता है.

इस मामले के चारों दोषियों पवन कुमार गुप्ता, विनय कुमार मिश्रा, अक्षय कुमार और मुकेश कुमार सिंह को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है. निचली अदालत ने सभी चार दोषियों को एक फरवरी को तिहाड़ जेल में सुबह छह बजे फांसी देने के लिए 17 जनवरी को मृत्यु वारंट जारी किया था. लेकिन इस बीच मामले के एक दोषी विनय ने राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल की है. इस दया याचिका के लंबित होने के कारण अदालत को डेथ वारंट स्थगित करना पड़ा है. अभियुक्तों के वकील ने दलील दी कि नियम कहते हैं कि जब एक अभियुक्त की अर्जी लंबित हो तो दूसरे को फांसी पर नहीं चढ़ाया जा सकता है. इससे पहले सात जनवरी को अदालत ने फांसी की तारीख 22 जनवरी तय की थी. लेकिन तब भी एक दोषी की दया याचिका के कारण डेथ वारंट खारिज करना पड़ा था.

सोलह दिसंबर, 2012 की रात को दक्षिण दिल्ली में एक चलती बस में 23 साल की पैरामेडिकल छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार और बर्बरता की गयी थी. सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी थी.