वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का दूसरा बजट बाजार की उम्मीदों पर खरा उतरता नहीं दिख रहा है. बजट के बाद बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स शनिवार को 988 अंक का गोता लगाकर 40,000 अंक से नीचे आ गया. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 300.25 अंक या 2.51 प्रतिशत टूटकर 11,661.85 अंक पर आ गया.

विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को उम्मीद थी कि सरकार सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए कदम उठाएगी, बजट को लेकर उनकी उम्मीदें काफी ऊंची थीं, लेकिन बजट उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा. वित्त मंत्री द्वारा बजट भाषण में चालू वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.8 प्रतिशत करने की घोषणा के साथ बाजारों में जोरदार गिरावट आई. इससे पहले राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 3.3 प्रतिशत रखा गया था.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विभिन्न प्रकार की रियायतों को छोड़ने को तैयार करदाताओं के लिए घटी हुई दरों वाले वैकल्पिक आयकर स्लैब का प्रस्ताव किया है. लेकिन इसको लेकर विश्लेषकों ने कहा कि आयकर स्लैब में बदलाव से कर बचत के निवेश माध्यमों में प्रवाह घटने की आशंका है. इसके अलावा लाभांश वितरण कर का बोझ निवेशकों पर डालने का प्रस्ताव किया गया है जिससे धारणा नकारात्मक हुई.

विशेषज्ञों का कहना है ‘वृद्धि बढ़ाने के उपायों का अभाव शेयर बाजारों के लिए नकारात्मक रहा. नयी आयकर व्यवस्था भी कर बचत वाली इक्विटी बचत योजनाओं की दृष्टि से नकारात्मक है. इसके अलावा लाभांश वितरण कर का बोझ लाभांश पाने वालों पर डाला गया है. इसका भी बाजार पर प्रतिकूल असर पड़ा. कुल मिलाकर बजट शेयर बाजारों की दृष्टि से नकारात्मक है.’ जानकारों का मानना है कि सिर्फ राजनीतिक उद्देश्य से आयकर स्लैब में नाममात्र का बदलाव किया गया है, जिससे निकट भविष्य में वृद्धि की संभावनाओं में कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं आने वाला है.