बतौर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपना दूसरा बजट पेश किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की दूसरी सरकार 30 मई, 2019 को बनी थी. इसके कुछ दिनों बाद निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2019-20 का पूर्ण बजट पेश किया था. लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार ने साल 2019-20 के लिए अंतरिम बजट पेश किया था.

जब मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट आया तो उस वक्त विश्लेषकों का कहना था इसमें स्पष्टता का अभाव है. कहा गया कि बजट में बहुत कुछ करने की इच्छा तो दिखती है लेकिन इसके लिए कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है. अब जब निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2020-21 का बजट पेश किया है तो भी जानकारों को यही लग रहा है कि इसमें भी बहुत कुछ करने की बात तो वित्त मंत्री कर रही हैं लेकिन इन लक्ष्यों को हासिल कैसे किया जाएगा, इसे लेकर कोई स्पष्टता नहीं है.

ऐसे में यह लग रहा है कि बतौर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अस्पष्ट बजट की परिपाटी शुरू कर रही हैं. जबकि बजट के बारे में आम धारणा यह रही है कि इसमें आंकड़ों और तथ्यों के जरिए अगले एक साल के लिए एक स्पष्ट रोडमैप सुझाया जाता है. इसमें जो लक्ष्य रखे जाते हैं, वे भी स्पष्ट होते हैं और इसके लिए कितने पैसे का आवंटन हुआ है, यह भी बिल्कुल स्पष्ट होता है. साथ ही इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए किन योजनाओं को सहारा लिया जाएगा, इसका उल्लेख भी साफ तौर पर होता है. लेकिन निर्मला सीतारमण के न तो पहले बजट में यह स्पष्टता दिखी थी और न ही दूसरे बजट में दिखती है.

वित्त वर्ष 2020-21 के अपने बजट भाषण की शुरुआत में वित्त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2019 में जो जनादेश मिला है, वह उनकी आर्थिक नीतियों पर विश्वास करके मिला है. उन्होंने कहा, ‘यह बजट जनता की आय सुनिश्चित करने और क्रय शक्ति बढ़ाने वाला है. केवल उच्च वृद्धि से ही हम इस लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं और हमारे युवाओं को लाभप्रद एवं सार्थक रोजगार दे सकते हैं.’ लेकिन वित्त मंत्री ने अपने पूरे बजट भाषण में स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया कि कैसे वे आम लोगों की आय और क्रय शक्ति को बढ़ाएंगी और कैसे उच्च वृद्धि दर को हासिल करके युवाओं को लाभप्रद एवं सार्थक रोजगार मुहैया कराया जाएगा.

वित्त मंत्री सीतारमण ने अपने बजट भाषण में फिर से यह बात दोहराई कि मोदी सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लिए प्रतिबद्ध है. किसानों की आय दोगुनी करने की बात पहली बार 2016-17 के बजट में की गई थी. लेकिन तब से लेकर अब तक चार साल गुजरने के बावजूद इस दिशा में कोई खास प्रगति नहीं हो पाई है. अब जब इस लक्ष्य को हासिल करने की समय सीमा में सिर्फ दो ही साल बचे हैं तो वित्त वर्ष 2020-21 का बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री को इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए न सिर्फ एक स्पष्ट रोडमैप को सामने रखना चाहिए था बल्कि अब तक इस दिशा में क्या प्रगति हुई है, उसका भी स्पष्ट उल्लेख करना चाहिए था. लेकिन निर्मला सीतारमण ने दोनों में से कोई काम नहीं किया.

कृषि क्षेत्र के लिए चलाई जा रही जिन योजनाओं का जिक्र केंद्रीय वित्त मंत्री ने किया, उनसे यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में क्या प्रगति हुई है. किसानों को बाजार मुहैया कराने के मकसद से किसान रेल और कृषि उड़ान जैसी जिन योजनाओं का जिक्र वित्त मंत्री ने किया है, उन्हें लेकर भी कोई स्पष्टता नहीं है. यह बताया नहीं गया है कि इनके लिए कितना आवंटन प्रस्तावित है और इन सेवाओं की संख्या क्या होगी. इससे साफ है कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का जो लक्ष्य मोदी सरकार ने रखा है, वह फिलहाल कोई सुचिंतिति योजना नहीं बल्कि भाषण ही है.

देश के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के मकसद से स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 69,000 करोड़ रुपये के आवंटन की बात केंद्रीय वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में की. लेकिन स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए जो घोषणाएं निर्मला सीतारमण ने कीं, उनमें भी स्पष्टता का अभाव है. इसे कुछ उदाहरणों के जरिए समझा जा सकता है.

किफायती कीमतों पर जेनरिक दवाएं उपलब्ध कराने वाली जन औषधि केंद्र योजना को देश के हर जिले में ले जाने की बात केंद्रीय वित्त मंत्री ने की. लेकिन यह योजना तो पहले से चल रही है और इस योजना के तहत 5,000 से अधिक जो जन औषधि केंद्र खुले हैं, वे देश के तकरीबन हर जिले को छू चुके हैं. वित्त मंत्री अगर हर जिले में विस्तार की बात करते हुए इन केंद्रों की संख्या 10,000 तक ले जाने की बात कहतीं तो इस घोषणा में एक स्पष्टता होती. इसी तरह वित्त मंत्री ने ‘टीबी हारेगा, देश जीतेगा’ अभियान की चर्चा की जिसके तहत 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है. वित्त मंत्री ने इसकी चर्चा तो की लेकिन इसमें सुधार की कोई स्पष्ट बात करने की जगह वित्त मंत्री ने सिर्फ इतना कहा कि इस योजना को और मजबूत बनाया जाएगा.

वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि विदेशों में शिक्षक, नर्स और पैरा मेडिकल स्टाफ की भारी मांग है लेकिन यहां से जो लोग इन कार्यों के लिए जाते हैं, वे पेशेवर दक्षता के मामले में कम रह जाते हैं. इसलिए इन लोगों की दक्षता को सुधारने की जरूरत है. वित्त मंत्री ने इसके लिए विशेष ब्रिज कोर्सेज की घोषणा की. लेकिन अब तक यह कोर्स तैयार नहीं किया गया है और यह काम स्वास्थ्य मंत्रालय और कौशल विकास मंत्रालय मिलकर करेंगे. वित्त मंत्री ने दूसरे संदर्भों में भी कौशल विकास की जरूरतों को रेखांकित किया. लेकिन कौशल विकास के लिए उन्होंने 3,000 करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा की. जानकारों का मानना है कि कौशल विकास के मामले में भारत के श्रम बल के सामने जो संकट है, उसके समाधान के लिए यह बजट आवंटन पर्याप्त नहीं है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अर्थव्यवस्था में मध्यम, लघु एवं सूक्ष्म उद्यमों यानी एमएसएमई के महत्व को तो रेखांकित किया है लेकिन इनके लिए जो घोषणाएं उन्होंने की हैं, उनमें स्पष्टता नहीं है. सरकार कैसे एमएसएमई के जरिए आर्थिक विकास को गति देने की योजना पर आगे बढ़ेगी, इसमें कोई स्पष्टता बजट में नहीं दिख रही है.

आयकर के मामले में भी यही अस्पष्टता है. वित्त मंत्री ने आम लोगों के लिए आयकर के नए ढांचे की घोषणा की है. इसे कई नए स्लैब्स में बांटा गया है जो पहले से कम टैक्स देने की बात करते हैं. लेकिन यहां एक लेकिन भी है. इसका लाभ उन्हीं लोगों को मिल पाएगा जो किसी तरह की कर छूट का लाभ नहीं लेंगे. जो लोग कर छूट का लाभ लेंगे, उन्हें पुराने कर ढांचे के हिसाब से ही कर चुकाना होगा. अब ऐसे में लोगों को यह माथा-पच्ची करनी है कि वे पुराने तरीके से टैक्स देने पर फायदे में रहेंगे या नये तरीके से.

इससे पहले के बजट में विनिवेश को लेकर जब घोषणा होती थी तो यह स्पष्ट लक्ष्य रखा जाता था कि इसके जरिये कितने पैसे और कैसे इकट्ठे किए जाएंगे. इस बार निर्मला सीतारमण ने विनिवेश का लक्ष्य 2.1 लाख करोड़ रुपये रखा है. पिछले साल यह करीब एक लाख करोड़ रुपये का था जो पूरा नहीं हो सका. ऐसे में इस साल का लक्ष्य हासिल करना और भी मुश्किल लगता है. इस मामले में वित्त मंत्री ने सिर्फ इतना कहा है कि भारतीय जीवन बीमा निगमके एक हिस्से का विनिवेश आईपीओ के जरिए किया जाएगा. बाद में अपनी प्रेस कॉन्फरेंस में उन्होंने विनिवेश का लक्ष्य हासिल करने से जुड़ी कुछ और जानकारी दीं. इसमें यह भी शामिल था कि पिछले साल मोदी सरकार ने विनिवेश के जो प्रयास किये थे वे इस साल रंग लाने वाले हैं. लेकिन अभी भी इसमें कई किंतु-परंतु हैं.

ऐसे ही और भी कई बातें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2020-21 के बजट में कही हैं जिनमें इच्छा तो बड़े लक्ष्य की दिखती है लेकिन इसे कैसे हासिल किया जाएगा, इसे लेकर स्पष्टता का साफ अभाव दिखता है.