1- जेडीयू मुखिया और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बीते हफ्ते पार्टी उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर और महासचिव पवन वर्मा को बाहर का दरवाजा दिखा दिया. ये वही प्रशांत किशोर हैं जिन्हें कुछ समय पहले तक नीतीश कुमार भविष्य बता रहे थे. इस पूरे घटनाक्रम को लेकर बीबीसी पर मणिकांत ठाकुर की टिप्पणी

नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर को पार्टी से निकालकर क्या संदेश दिया है?

2-कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश के कई शहरों में सीएए विरोधी प्रदर्शनों के बाद पुलिस पर कइयों ने अल्पसंख्यक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं. द प्रिंट हिंदी पर अपने इस लेख में आसिम अली का मानना है कि दंडमुक्ति के जिस संस्थागत भाव के कारण आज यूपी पुलिस के सिर पर खून सवार रहता है, उसका पोषण कांग्रेसी सरकारों के कार्यकाल में हुआ है.

यूपी पुलिस योगी शासन में ही मुस्लिम-विरोधी नहीं बनी, बल्कि धर्मनिरपेक्ष कांग्रेस का अतीत भी रक्तरंजित रहा है

3-एक फरवरी को पेश आम बजट को सरकार ऐतिहासिक बता रही है तो विपक्ष इसे खोखला करार दे रहा है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि इस बजट में सभी वर्गों का ख्याल रखा गया है. उधर, विपक्षी दल कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी का दावा है कि बजट में सिर्फ बातें हैं. इस सबके बीच अलग-अलग हिस्सों में बसे आम लोग बजट के बारे में क्या सोचते हैं? डाउन टू अर्थ पर अनिल अश्वनी शर्मा की रिपोर्ट.

बजट 2020-21: क्या कहते हैं देश के पांच परिवार?

4-इंसुलिन ने जानलेवा डायबिटीज को अब ऐसा बना दिया है कि दुनिया भर के करोड़ों लोग सालों साल इस बीमारी के साथ जी सकते हैं. लेकिन पिछले 10 सालों में अमेरिका में इंसुलिन के दाम आसमान छूने लगे हैं. यह दवा आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही है. डॉयचे वेले पर छपा यह लेख बताता है कि ऐसे में लोग इसे हासिल करने का दूसरा तरीका अपनाने को मजबूर हैं.

ब्लैक मार्केट से इंसुलिन खरीदने को मजबूर अमेरिकी मरीज

5-चुनावी यानी इलेक्टोरल बॉन्ड्स को लेकर बहस फिर गर्म है. सरकार इसे पारदर्शिता की कवायद बताती है जबकि विपक्ष इसे घोटाला. उधर, न्यूजलॉन्ड्री हिंदी पर नितिन सेठी की यह रिपोर्ट बताती है कि भारत के राजनीतिक दलों की झोली में हज़ारों करोड़ का चंदा डालने के लिए जब अनाम अरबपति इलेक्टोरल बॉन्ड का इस्तेमाल करते हैं, तो इसकी कीमत आखिरकार आम भारतीय करदाता चुकाता है.

इलेक्टोरल बॉन्ड: जो पैसा राजनीतिक दलों के खाते में जा रहा है उसका बोझ करदाता उठा रहा है