आठवां ऑस्ट्रेलियाई ओपन खिताब जीतकर नोवाक जोकोविच ने महानतम टेनिस खिलाड़ियों की जमात में अपनी जगह और मजबूत कर ली है. पीटीआई के मुताबिक इस शानदार फार्म का श्रेय उन्होंने शाकाहार, योग और ध्यान को दिया है. युद्ध की विभीषिका झेलने वाले बेलग्राद में पैदा हुए सर्बिया के इस टेनिस स्टार ने सूखे स्वीमिंग पूल में अभ्यास करके टेनिस का ककहरा सीखा. अब रिकार्ड 14 करोड़ डालर ईनामी राशि के साथ नोवाक जोकोविच मोंटे कार्लो में महल सरीखे घर में रहते हैं.

अपने करियर में कई उतार-चढ़ाव झेल चुके नोवाक जोकोविच अब पहले से अधिक परिपक्व और मंझे हुए नजर आते हैं. अब तक 17 ग्रैंडस्लैम जीत चुके 32 वर्ष के इस खिलाड़ी की नजरें रोजर फेडरर और रफेल नडाल का रिकार्ड तोड़ने पर लगी हैं जिनके लिए यह आंकड़ा क्रमश: 20 और 19 है.

नोवाक जोकोविच की दिनचर्या अनूठी और कइयों के लिए अनुकरणीय है. वे सूर्योदय से पहले अपने परिवार के साथ उठ जाते हैं, सूर्योदय देखते हैं और उसके बाद परिवार को गले लगाते हैं. साथ में गाते हैं और योग करते हैं. दो बच्चों के पिता नोवाक जोकोविच पूरी तरह से शाकाहारी हैं. नेटफ्लिक्स की डाक्यूमेंट्री ‘द गेम चेंजर्स’ में उन्होंने कहा ,‘उम्मीद है कि मैं दूसरे खिलाड़ियों को शाकाहार अपनाने के लिये प्रेरित कर सकूंगा.’

आठवां ऑस्ट्रेलियाई ओपन जीतने का जश्न नोवाक जोकोविच पार्टी करके नहीं बल्कि शहर के बॉटेनिकल गार्डन में अंजीर के पेड़ पर चढकर मनाया. उन्होंने कहा, ‘यह ब्राजीली अंजीर का पेड़ मेरा दोस्त है जिस पर चढना मुझे पसंद है. यह मेरा सबसे मनपसंद काम है.’

पहली बार 2008 में ऑस्ट्रेलियाई ओपन जीतने वाले नोवाक जोकोविच ने 2011 से 2016 के बीच में 24 में से 11 ग्रैंडस्लैम जीते और सात के फाइनल में पहुंचे. इसके बाद वे खराब दौर और कोहनी की चोट से जूझते रहे. 2017 के विम्बलडन के बाद वे फार्म में लौटे और तब से एक के बाद एक उपलब्धियां अपने नाम कर रहे हैं.

इस बीच नोवाक जोकोविच ने अध्यात्म की शरण ली और लंबे ध्यान सत्रों में भाग लिया. इसने उन्हें अधिक सहनशील और संतुष्ट बनाया. ऑस्ट्रेलियाई ओपन खिताब के साथ अपना 17वां ग्रैंडस्लैम जीतने वाले नोवाक जोकोविच ने चेताया है कि अब उनकी नजरें रोजर फेडरर के 20 ग्रैंडस्लैम के रिकार्ड पर लगी हैं. उन्होंने कहा, ‘ग्रैंडस्लैम की वजह से ही मैं खेल रहा हूं. मेरी नजरें सबसे ज्यादा ग्रैंडस्लैम जीतने का रिकार्ड बनाने पर लगी है. यही सबसे बड़ा लक्ष्य है.’