महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि वे राज्य में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर यानी एनआरसी लागू नहीं होने देंगे. शिवसेना मुखपत्र सामना को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि एनआरसी से हिंदुओं को भी दिक्कत होगी. उद्धव ठाकरे ने कहा, ‘एनआरसी के तहत न सिर्फ मुस्लिम बल्कि हिंदुओं को भी अपनी नागरिकता साबित करने में दिक्कत होगी. इसलिए मैं एनआरसी को यहां नहीं आने दूंगा.’ हालांकि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर उन्होंने सहमति के संकेत दिए. उद्धव ठाकरे का कहना था, ‘नागरिकता संशोधन कानून के तहत किसी को भी देश से बाहर नहीं निकाला जा सकता.’

महाराष्ट्र में जिन कांग्रेस और एनसीपी के साथ उद्धव ठाकरे ने सरकार बनाई है वे एनआरसी ही नहीं बल्कि सीएए के भी खिलाफ हैं. सीएए में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले गैरमुस्लिमों को आसानी से भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है. लेकिन इसका तीखा विरोध हो रहा है. बीते दिसंबर में देश के अलग-अलग हिस्सों में यह विरोध हिंसा में तब्दील हो गया जिसमें कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई. अभी भी दिल्ली के शाहीन बाग सहित देश के कई इलाकों में इस कानून के खिलाफ धरना-प्रदर्शन जारी है.

विपक्ष ने सीएए को भारत की आत्मा पर हमला बताया है. उसका यह भी कहना है कि यह कानून भारतीय संविधान के खिलाफ है. उधर, इस आरोप को खारिज करते हुए सरकार का कहना है कि कानून जारी रहेगा. गृह मंत्री अमित शाह कह चुके हैं कि जिसे जितना विरोध करना हो करे लेकिन सीएएस वापस नहीं होने वाला. उन्होंने इस मुद्दे पर हो रहे विरोध को विपक्ष के दुष्प्रचार का नतीजा भी बताया.

यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंच गया है. अदालत ने इस मुद्दे पर सरकार को जवाब देने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने सीएए पर अंतरिम रोक लगाने से भी इनकार कर दिया है. उसने कहा कि अब इस पर फैसला भी संविधान पीठ ही करेगी. सीएए के खिलाफ शीर्ष अदालत में कुल 143 याचिकाएं दायर की गई हैं. इनमें केरल सरकार की याचिका भी शामिल है जिसमें इस कानून को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है.