केंद्र सरकार ने कहा है कि फिलहाल उसकी देश भर में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) की कवायद करने की कोई योजना नहीं है. लोकसभा में एक लिखित जवाब में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा, ‘अभी तक सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर एनआरसी तैयार करने का कोई फैसला नहीं लिया है.’ माना जा रहा है कि सरकार का यह बयान बीते दो महीनों से एनआरसी और नए नागरिकता कानून (सीएए) को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों को शांत करने के लिए आया है.

यह भी अहम है कि बजट से पहले संसद के दोनों सदनों को दिए गए अपने सालाना पारंपरिक संबोधन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी एनआरसी का कोई जिक्र नहीं किया था. हालांकि सीएए को उन्होंने ऐतिहासिक फैसला बताया था और कहा था कि इसके जरिये राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की इच्छा पूरी की गई है.

बीते साल ही असम में एनआरसी की कवायद निपटी थी. इसकी आखिरी सूची में 20 लाख लोग नहीं हैं. यानी उन्हें भारत का नागरिक नहीं माना गया है. इनमें से करीब 14 लाख हिंदू हैं. उधर, भाजपा का कहना है कि एनआरसी की इस कवायद में कई झोल रह गए हैं. पार्टी के मुताबिक सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले कई अवैध नागिरकों ने अधिकारियों को पैसा खिलाकर एनआरसी में अपना नाम शामिल करवा लिया.