पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानंद पर एक विधि छात्रा द्वारा यौन शोषण के आरोपों पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय का कहना है कि ‘यह कहना मुश्किल है कि इसमें किसने किसका शोषण किया है.’ अदालत ने यह बात दुष्कर्म के आरोपित स्वामी चिन्मयानंद को जमानत देते समय कही.

इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी ने भाजपा नेता चिन्मयानंद को जमानत देते हुए अपने आदेश में कहा, ‘वास्तव में चिन्मयानंद और पीड़ित छात्रा दोनों ने एक-दूसरे का इस्तेमाल किया है.’ चिन्मयानंद की जमानत याचिका मंजूर करते हुए न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी ने उन आरोपों का भी संज्ञान लिया कि छात्रा और उसके दो मित्रों ने कुछ वीडियो बनाकर नेता को ब्लैकमेल करने का प्रयास किया था. अदालत ने इसका भी संज्ञान लिया कि छात्रा का परिवार आरोपित व्यक्ति के उदार व्यवहार से लाभान्वित हुआ है. अदालत ने कहा, ‘मौजूदा हालात में ऐसा लगता है कि यह मामला पूरी तरह से ‘किसी लाभ के बदले कुछ काम करने का है. यहां महत्वपूर्ण प्रश्न यह उठता है कि आवेदनकर्ता को जमानत दी जाए या नहीं?’ जमानत के आदेश में न्यायाधीश ने कहा, ‘दोनों ही पक्षों ने अपनी-अपनी मर्यादा का उल्लंघन किया है, अब, इस स्थिति में यह तय करना मुश्किल है कि किसने किसका उत्पीड़न किया है. वास्तव में दोनों ने एक-दूसरे का इस्तेमाल किया है.’

अदालत ने कहा, ‘देखने वाली बात यह भी है कि रिकॉर्ड में कोई भी ऐसी चीज़ नहीं है जिससे यह साबित हो कि छात्रा पर कथित उत्पीड़न की अवधि के दौरान, उसने अपने परिजनों से इसका जिक्र भी किया हो.’ न्यायाधीश ने कहा कि यहां पहुंचकर अदालत इस नतीजे पर पहुंची है कि ‘यह मामला पूरी तरह से किसी लाभ के बदले काम करने का है.’ फैसले में अदालत ने कहा, ‘एक समय के बाद अधिक हासिल करने के लालच में लगता है कि छात्रा ने अपने साथियों के साथ आरोपी के खिलाफ षड़यंत्र रचा और अश्लील वीडियो के जरिए उसे ब्लैकमेल करने का प्रयास किया. अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘फिरौती के मामले में छात्रा को पहले ही जमानत दी जा चुकी है. ऐसे में चिन्मयानंद की जमानत मंजूर करने से मना करने का कोई न्यायसंगत कारण नहीं बनता.’

इसके साथ ही अदालत ने इस मामले की सुनवाई शाहजहांपुर से लखनऊ की निचली अदालत में स्थानांतरित कर दी है. दरअसल, छात्रा ने आशंका जताई थी कि मामले की सुनवाई चिन्मयानंद के पैतृक शहर शाहजहांपुर में होने पर वह अपने रसूख से इसे प्रभावित कर सकते हैं. चिन्मयानंद के ट्रस्ट द्वारा संचालित शाहजहांपुर विधि महाविद्यालय में पढ़ने वाली छात्रा ने ही उन पर महीनों तक यौन शोषण करने का आरोप लगाया है. इसी से जुड़े एक अन्य मामले में यौन शोषण पीड़िता पर आरोप है कि उसने चिन्मयानंद से पांच करोड़ रुपये की वसूली करने का प्रयास किया था. इन आरोपों के आधार पर पीड़ित छात्रा की गिरफ्तारी भी हुई थी. उच्च न्यायालय ने छात्रा को चार दिसंबर, 2019 को जमानत दे दी थी.