1971 में एक बड़ी ज़बरदस्त हिट फिल्म बनी थी, ‘हरे राम हरे कृष्ण’. हीरो थे देव आनंद और हीरोइन थीं ज़ीनत अमान. इसमें एक गाना था ‘राम का नाम बदनाम ना करो’. इसके गीतकार थे आनंद बख्शी और संगीत दिया था राहुल देव बर्मन जी ने. रामनामी दुपट्टे लपेटे, चरस-गांजे का दम लगा रहे हिप्पियों के झुंड को संबोधित करते हुए देव आनंद गा रहे थे - “देखो ऐ दीवानो, तुम ये काम ना करो, राम का नाम बदनाम ना करो, बदनाम ना करो”.

दिल्ली के जामिया नगर में जिस व्यक्ति ने अकारण गोली चलाकर एक छात्र को घायल कर दिया, उसने अपने फेसबुक अकाउंट में भगवान राम का नाम लिया है और यह भी कहा है कि उसकी अंतिम यात्रा में उसे भगवे में लपेट कर जय श्री राम के नारों के साथ ले जाया जाए. इससे मुझे ‘हरे राम हरे कृष्ण’ के इस गाने की बरबस याद हो आयी.

हिप्पियों को यह भ्रम था कि ‘हरे राम हरे कृष्ण’ का जाप कर दिया तो उनका नशा सेवन या मुक्त यौनाचार सब माफ़ है. आजकल कुछ लोगों को यह भ्रम हो गया दिखता है कि कुछ भी कर के ‘जय श्री राम’ का नारा लगा देंगे तो सारे गुनाह माफ़. जून 2019 में झारखण्ड में जब तबरेज़ अंसारी को हिंसक भीड़ बांधकर क्रूरतापूर्वक पीट रही थी तो उससे ज़बरदस्ती ‘जय श्री राम’ और ‘जय हनुमान’ के नारे लगवाए गए थे. उससे पूर्व आम चुनाव के दौरान जब प्रकाश लकड़ा और तीन अन्य ईसाई आदिवासियों को पीटा जा रहा था तो उनके साथ भी यही सुलूक किया गया था. पश्चिम बंगाल में हाफ़िज़ मोहम्मद शाहरुख हल्दर को ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने को कहा गया और जब उसने ऐसा नहीं किया तो उसे चलती ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया. बुलंदशहर में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या के आरोपियों को जब ज़मानत मिली तो भीड़ ने उनका स्वागत ‘जय श्री राम’, ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के नारों से किया. गुजरात दंगों के समय भी अनेक दंगाई ‘जय श्री राम’ के नारे लगा रहे थे.

इन नारों को सबसे ज्यादा लगाने वाली पीढ़ी से एक-दो पीढ़ी पीछे वाले लोग जानते होंगे कि ‘जय श्री राम’ का प्रयोग कभी भी आम नहीं था. लोग अभिवादन के लिए ‘जै राम जी की’, ‘जै सिया राम’, या ‘राम राम’ बोला करते थे. फ़ौज में राजपूताना राइफल्स का अभिवादन ‘राम राम’ रहा है. इनका युद्धघोष भी ‘राजा रामचंद्र की जय’ है. 1987-88 में रामानंद सागर जी के अतिप्रसिद्ध टीवी सीरियल रामायण में हनुमान जी और अन्य के द्वारा ‘हर हर महादेव’ के साथ ‘जय श्री राम’ का युद्धघोष के रूप में प्रयोग किया गया. इसके बाद यह लोगों की जुबान पर चढ़ गया. फिर तो आप जानते ही हैं कि कैसे इसका प्रयोग रामजन्मभूमि आन्दोलन में किया गया. ‘हर हर महादेव’ युद्धघोष के रूप में बहुत समय से प्रचलित था. पूरे विश्व में केवल बनारस में यह अभिवादन के रूप में या प्रसन्नता व्यक्त करने में भी प्रयोग किया जाता है.

यानी यह माना जा सकता है कि ‘जय श्री राम’ का प्रयोग अभिवादन के रूप में प्रचलन में नहीं था. न ही इसका प्रयोग खुशी जाहिर करने के लिए किया जाता था. आपके लोग ज़मानत पर छूट गए, आप खुश हैं, ठीक है. पर खुशी में ‘जय श्री राम’ कब कहा जाता था? आप ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ जब चाहें तब कहने को स्वतंत्र हैं. पर हम देशभक्ति की बात तब करते हैं जब किसी अन्य देश की तुलना में बात हो रही हो. हमारे सैनिकों ने कहीं दुश्मन के खिलाफ पराक्रम दिखाया हो या हम कोई मुकाबला जीत गए हों, तब ये नारे लगाये जाएं तो उनका कोई औचित्य है. हत्या के आरोपियों को ज़मानत मिल गयी, यह आपकी व्यक्तिगत खुशी का अवसर हो सकता है, इसमें आप देशभक्ति को या धर्म को बेमतलब कैसे घसीट सकते हैं? इस पर चाहें तो यह कुतर्क दिया जा सकता है कि हत्या धर्म और देश की रक्षा के लिए ही तो की गई थी.

‘जय श्री राम’ का युद्धघोष या ललकार के रूप में उपयोग हालिया ही है. बावजूद इसके कि भगवान राम पर या उनकी जय-जयकार करने पर किसी का कॉपीराइट नहीं है, कुछ लोगों ने यह मान लिया है कि यह नारा उनके हिन्दू होने या ‘शक्तिशाली हिन्दू’ होने का प्रतीक है. एक राजनीतिक पार्टी विशेष इस अवधारणा का समर्थन करती है. आज जितने भी लोग अपराध करते समय या आपराधिक गतिविधियों के प्रसंग में जब ‘जय श्री राम’ का नारा लगाते हैं तो उसके पीछे उनका असली उद्देश्य यह दिखाना होता है कि वे न केवल ‘शक्तिशाली हिन्दू’ हैं बल्कि उस राजनैतिक पार्टी और उसकी विचारधारा का प्रतिनिधित्व भी करते हैं.

कहने की ज़रूरत नहीं कि इन लोगों का भगवान राम के आदर्शों से कोई लेना-देना नहीं है. नागरिकता क़ानून को लेकर इतने समय से विरोध हो रहा है. मामला शरणार्थियों को नागरिकता देने से सम्बंधित है. जो लोग दिन-रात भगवान राम की दुहाई देते नहीं थकते, क्या वे जानते हैं इस विषय में स्वयं भगवान राम का क्या आदर्श है? सुन्दरकाण्ड में प्रसंग है, जब विभीषण भगवान राम के पास शरण मांगने आया तो भगवान ने इस पर सुग्रीव की राय जाननी चाही. सुग्रीव ने कहा कि राक्षसों की माया कौन जाने, उन्हें तो वह रावण का जासूस लगता है और उसे बांध देना चाहिए. “जानि न जाई निसाचर माया, कामरूप केहि कारन आया”. “भेद हमार लेन सठ आवा, राखिअ बांधि मोहि अस भावा”.

इसके उत्तर में भगवान ने घोषणा की, ‘मम पन सरनागत भयहारी’. मेरा प्रण है, शरणागत के भय को हर लेना. भगवान ने आगे कहा, “सरनागत कहुं जे तजहिं निज अनहित अनुमानि, ते नर पांवर पापमय तिन्हहि बिलोकत हानि”. मतलब, जो मनुष्य अपने अहित का अनुमान करके शरण में आये हुए का त्याग कर देते हैं, वे पामर (क्षुद्र) हैं, पापमय हैं, उन्हें देखने से भी पाप लगता है! भगवान कहते हैं, “जौं सभीत आवा सरनाई, रखिहऊं ताहि प्राण की नाईं”. अर्थात, जो भयभीत होकर मेरी शरण में आया है, तो मैं उसे प्राणों की तरह रखूंगा. इस पर प्रसन्न होकर हनुमान जी ‘जय कृपाल’ कहते हुए विभीषण को लाने चल देते हैं.

और यहां क्या होने जा रहा है? हम अपनी दया को भी धर्मं के आधार पर बांटेंगे? अगर आपके सामने दो भूखे प्राणी खड़े हों और आपके पास दोनों को देने के लिए भोजन हो, तो क्या आप उनसे उनका धर्म पूछकर उन्हें भोजन देंगे, और धर्म विशेष के भूखे को भोजन ही नहीं देंगे भले उसके प्राण निकल रहे हों? ये तो मित्रो, भगवान राम के आदर्श नहीं हैं. भगवान को तो करुणानिधान कहते हैं. विभीषण ने भगवान को देखते ही कहा, “त्राहि त्राहि आरत हरन सरन सुखद रघुवीर”. हे दुखियों के दुःख दूर करने वाले और शरणागत को सुख देने वाले श्री रघुवीर, मेरी रक्षा कीजिये, रक्षा कीजिये.

भगवान ने स्पष्ट कहा है, “निर्मल मन जन सो मोहि पावा, मोहि कपट छल छिद्र न भावा”. जो मनुष्य निर्मल स्वभाव का होता है, वही मुझे पाता है. मुझे कपट और छल छिद्र नहीं सुहाते. भगवान राम न तो गगनचुंबी मंदिर बनाने से प्रसन्न होंगे और न बेमतलब ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने से. उनके आदर्शों का अनुसरण करने से प्रसन्न होंगे.

यहां नागरिकता क़ानून के कानूनी या संवैधानिक पहलुओं पर बात नहीं हो रही है. उस पर अभी सर्वोच्च न्यायलय का फैसला आना शेष है. यहां केवल नैतिकता की बात हो रही है. हमारी करुणा ‘सिलेक्टिव’ नहीं होनी चाहिए. इस सारे प्रकरण में यह महत्वपूर्ण नहीं है कि कुछ लोगों को नागरिकता मिलेगी या नहीं. महत्वपूर्ण यह है कि जो भी किया जाये, उससे हमारी नैतिकता को और भगवान राम के नाम पर उनके महान आदर्शों को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए.


डॉ निर्मल चन्द्र अस्थाना रिटायर्ड पुलिस महानिदेशक हैं.