जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियों उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती सहित चार नेताओं पर जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) लगा दिया गया है. ये सभी नेता पिछले साल पांच अगस्त के बाद से ऐहतियातन हिरासत में रखे गए थे. इस हिरासत की अवधि गुरुवार को समाप्त हो रही थी. उमर अब्दुल्ला के पिता और नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुखिया फारूक अब्दुल्ला पहले से ही पीएसए के तहत बंद हैं.

पीएसए उन लोगों पर लगाया जा सकता है जिन्हें सुरक्षा और शांति के लिए खतरा माना जाता हो. 1978 में जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला ने इस कानून को लागू किया था. 2010 में इसमें संशोधन किया गया था जिसके तहत बगैर ट्रायल के ही कम से कम छह महीने तक किसी को भी हिरासत में रखा जा सकता है. राज्य सरकार चाहे तो इस अवधि को बढ़ाकर दो साल तक भी किया जा सकता है.

बीते साल अगस्त में केंद्र ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी कर दिया था. इसके साथ ही उसने राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने का फैसला किया था - जम्मू-कश्मीर और लद्दाख. यह फैसला अमल में आ चुका है. इसके बाद से जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट सहित कई बुनियादी सेवाओं पर पाबंदियां लगा दी गई थीं जिन्हें सिलसिलेवार तरीके से हटाया जा रहा है.

इस बीच पीएसए लगने के बाद महबूबा मुफ्ती के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट किया गया है. इसमें कहा गया है कि देश के मूल्यों का अपमान किया जा रहा है और ऐसे में लोग कब तक दर्शक बने रहेंगे. महबूबा मुफ्ती का ट्विटर अकाउंट उनकी बेटी संभालती हैं.