कालितारा मंडल 111 साल की हैं. आजाद भारत का शायद ही कोई ऐसा चुनाव हो जिसमें उन्होंने वोट न डाला हो. आज एक बार फिर दिल्ली विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपन मताधिकार का इस्तेमाल किया. इस मौके पर चुनाव अधिकारियों ने दिल्ली की इस सबसे बुजुर्ग वोटर को सम्मानित भी किया.

कालितारा मंडल का जन्म 1908 में अविभाजित भारत में हुआ. आज वह हिस्सा बांग्लादेश है. उन्हें दो बार शरणार्थी बनना पड़ा. पहली बार तब जब देश आजाद हुआ. हालात सामान्य होने पर वे भारत से बांग्लादेश स्थित अपने घर बाड़ीसाल लौटीं, लेकिन 1971 में हालात फिर खराब हो गए. कालितारा मंडल इसके बाद भारत आईं तो यहीं की होकर रह गईं.

आज वे दिल्ली के सीआर पार्क इलाके में रहती हैं. पीटीआई से बात करते हुए वे पुराने दौर के चुनावों को याद करती हैं. कालितारा मंडल कहती हैं, ‘हां, मुझे याद है. वे मेरे हाथ के अंगूठे का निशान लेते थे. फिर पर्ची को फोल्ड करके बॉक्स में डाला जाता था.’ आज भी उनमें वोट डालने को लेकर वही पुराना उत्साह है.

एक वरिष्ठ चुनाव अधिकारी के मुताबिक मंडल परिवार ने इस बार पोस्टल बैलट सुविधा के लिए आवेदन किया था. लेकिन उन्हें ऐसा करने में देर हो गई. इसक बाद आयोग ने उन्हें और उनके परिवार को मतदान केंद्र तक लाने के लिए एक खास वाहन उपलब्ध कराया. कालितारा मंडल कहती हैं, ‘बाहर निकलिए और वोट डालिए. लोकतंत्र लोगों से चलता है और उनके हर वोट की कीमत होती है.’

दिल्ली चुनावों में इस बार 100 साल से ऊपर के 132 मतदाता हैं. इनमें 68 पुरुष हैं और 64 महिलाएं. चुनाव अधिकारियों के मुताबिक इन सभी को किसी ‘वीआईपी की तरह ट्रीट’ किया जाएगा.