1- भारत के करीबी रहे श्रीलंका के बारे में काफी समय से खबरें आती रही हैं कि वह चीन की तरफ झुक रहा है. चीन श्रीलंका में लगातार अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश करता रहा है और श्रीलंका में उसका स्वागत भी हुआ है. लेकिन श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे की मौजूदा पांच दिवसीय भारत यात्रा को कुछ और घटनाक्रमों के साथ मिलाकर देखें तो हालात अब बदलते लगते हैं. बीबीसी पर कमलेश की रिपोर्ट.

क्या श्रीलंका को अब चीन नहीं भारत भा रहा है?

2- देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू कई बार मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना के निशाने पर रहते हैं. पिछले दिनों संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के जवाब में 100 मिनट के अपने वक्तव्य में उन्होंने नेहरू का नाम 23 बार लिया. द प्रिंट हिंदी पर शेखर गुप्ता का मानना है कि इसके पीछे उनका मकसद न केवल नेहरू-गांधी परिवार और कांग्रेस को लांछित करके खत्म करना है, बल्कि उनका मानना है कि नेहरू ने आज़ादी के बाद के भारत की जो कल्पना की थी वह ‘दोषपूर्ण’ थी.

गांधी परिवार और कांग्रेस को खत्म करने के लिए क्यों मोदी बार-बार नेहरू का इस्तेमाल कर रहे हैं

3- जर्मनी में खतने पर पूरी तरह प्रतिबंध है. लेकिन यहां करीब 70 हजार ऐसी महिलाएं हैं जिनका खतना हो चुका है. इसको खत्म करने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं. डॉयचे वेले हिंदी पर मेलिना ग्रुंडमान और ऋषभ शर्मा की रिपोर्ट.

“खतना होने पर लगा कि मैं जिंदा लाश बन गई”

4- हाल में भाजपा की आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने दिल्ली के शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों का एक वीडियो ट्वीट किया था. वीडियो में दिख रहे लोगों का कहना था कि शाहीन बाग़ में नागरिकता संशोधन कानून और प्रस्तावित एनआरसी के ख़िलाफ़ धरना दे रही महिलाओं को इसके लिए पैसे दिए जा रहे है. वीडियो में दिख रहा एक शख्स दावा कर रहा था कि शाहीन बाग़ का प्रदर्शन कांग्रेस द्वारा प्रायोजित है. इस मामले की पड़ताल करती न्यूजलॉन्ड्री और ऑल्ट न्यूज की पड़ताल.

शाहीन बाग़ पर अमित मालवीय के सनसनीखेज़ दावे का सच

5- पिछले साल केंद्र सरकार ने भारतीय रिज़र्व बैंक से 1.76 लाख करोड़ रुपये लेने का फैसला लिया. इस साल यह एलआईसी में विनिवेश से 50,000 करोड़ रु से ज्यादा की रकम जुटा सकती है. उसकी इस कवायद को लेकर द वायर पर एमके वेणु का लेख.

आरबीआई और एलआईसी के बूते कब तक आर्थिक संकट से निबटेगी सरकार?