जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर जन सुरक्षा अधिनियम यानी पीएसए लगाए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. उनकी बहन सारा अब्दुल्ला पायलट ने इस कानून के तहत उनकी हिरासत को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है. उनका कहना है कि उमर अब्दुल्ला पर पीएसए लगाना न सिर्फ उनके संवैधानिक अधिकारों पर हमला है बल्कि अपने राजनीतिक विरोधियों को दबाने की भी साजिश है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह इस याचिका पर विचार करेगा.

उमर अब्दुल्ला और जम्मू-कश्मीर की एक और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती पांच अगस्त, 2019 से सीआरपीसी की धारा 107 के तहत हिरासत में थे. कानून के तहत छह महीने की उनकी यह एहतियातन हिरासत बीते गुरुवार को खत्म हो गई. इसके बाद उन पर पीएसए लगा दिया गया. यानी अब उनकी हिरासत को बिना किसी मुकदमे के तीन महीने से एक साल तक बढ़ाया जा सकता है. उमर अब्दुल्ला की हिरासत बढ़ाने के पीछे तर्क दिया गया है कि उनका लोगों पर बहुत ज्यादा असर है और उन्होंने आतंकवाद के चरम वाले दौर में भी मतदाताओं को वोटिंग बूथ तक लाने में सफलता पाई थी. उधर, महबूबा मुफ्ती के बारे में कहा गया है कि उन्होंने आतंकियों की मौत के बाद उनका महिमामंडन किया.