बीती 31 जनवरी की बात है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक ट्टीट किया. इसमें उन्होंने लिखा था, ‘नरेंद्र मोदी जी भारत के प्रधानमंत्री हैं. मेरे भी प्रधानमंत्री हैं. दिल्ली का चुनाव भारत का आंतरिक मसला है और हमें आतंकवाद के सबसे बड़े प्रायोजकों का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं. पाकिस्तान जितनी कोशिश कर ले, इस देश की एकता पर प्रहार नहीं कर सकता.’

अरविंद केजरीवाल का यह ट्वीट पाकिस्तान सरकार में विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री फव्वाद खान के एक ट्वीट के जवाब में आया था. इस ट्वीट में फव्वाद खान का कहना था कि लोगों को नरेंद्र मोदी को शिकस्त देनी चाहिए जो एक और राज्य खोने के डर से भड़काऊ बयान दे रहे हैं.

वैसे यह कोई पहली बार नहीं था जब पाकिस्तान का नाम दिल्ली चुनाव से जुड़ा हो. चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा नेताओं और समर्थकों की तरफ से पाकिस्तान का जिक्र बार-बार किया जाता रहा. यहां तक कहा गया कि यह चुनाव भारत-पाकिस्तान का मुकाबला है. ऐसे में यह जानना दिलचस्प हो सकता है कि उस पाकिस्तान के अखबारों ने दिल्ली चुनाव के नतीजों पर क्या लिखा है.

पाकिस्तान के ज्यादातर अखबारों ने इन नतीजों को अपनी सुर्खियों में शामिल किया है. एक्सप्रेस ने इसे ‘विवादित नागरिक संशोधन कानून मोदी को ले डूबा, दिल्ली विधानसभा चुनाव में बदतरीन शिकस्त’ के शीर्षक से लगाया है. अखबार लिखता है कि केंद्र में सत्ताधारी भाजपा तमाम सरकारी तंत्र का इस्तेमाल करने के बावजूद सिर्फ आठ सीटें जीत सकी, जबकि आम आदमी पार्टी ने 62 सीटें हासिल कीं. एक्सप्रेस के मुताबिक आप ने मोदी सरकार के घमंड को धूल चटा दी. उसने यह भी लिखा है कि दिल्ली के वोटरों ने विभाजनकारी राजनीति को खारिज कर दिया.

इसी तरह एक और प्रमुख अखबार जंग ने लिखा है कि दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर मैदान मार लिया और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भाजपा को फिर हार का सामना करना पड़ा. उधर, पाकिस्तान के प्रमुख अंग्रेजी दैनिक डॉन के मुताबिक यह चुनाव विवादित नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) लाने के बाद मोदी सरकार के लिए पहली चुनावी चुनौती थी. अखबार के मुताबिक आक्रामक प्रचार करते हुए भाजपा ने इस चुनाव के जरिए इस कानून पर लोगों का समर्थन हासिल करने की कोशिश की थी, लेकिन उसे झटका लगा. डॉन ने इन नतीजों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि के लिए भी झटका बताया है.

जियो न्यूज ने लिखा है कि दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी ने नरेंद्र मोदी की भाजपा का सूपड़ा साफ कर दिया. उसके मुताबिक चुनाव प्रचार के दौरान नागरिकता कानून का विरोध कर रहे लोगों को पाकिस्तान समर्थक करार दिया गया था. डेली पाकिस्तान ने लिखा हैकि हिंदू मतदाताओं को लुभाने के लिए अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ जहर उगला गया और नफरत का माहौल पैदा किया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद मतदाताओं ने मोदी सरकार की नीतियों को ठुकरा दिया.