दिल्ली विधानसभा चुनाव में शर्मनाक प्रदर्शन करने के बाद कांग्रेस का अंदरूनी झगड़ा फिर सतह पर आता दिख रहा है. पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के प्रभारी पीसी चाको ने बयान दिया है कि राज्य में कांग्रेस का पतन पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के समय शुरू हुआ. अपने इस बयान पर विवाद होने के बाद उन्होंने इस्तीफे की पेशकश भी कर डाली है. दिल्ली कांग्रेस के मुखिया सुभाष चोपड़ा पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं.

दिल्ली चुनाव में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी. यही नहीं, 70 में से 63 सीटों पर पार्टी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई. समाचार एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पीसी चाको का कहना था, ‘कांग्रेस का पतन 2013 में तब शुरू हुआ जब शीला जी सीएम थीं. नई पार्टी आप उभरी और वह कांग्रेस का समूचा वोट बैंक ले गई. हम इसे कभी वापस नहीं हासिल कर सके. यह अब भी आप के साथ है.’

इसके बाद पीसी चाको पर उनकी ही पार्टी के नेताओं ने निशाना साधा. महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मिलिंद देवड़ा ने कहा कि शीला दीक्षित एक असाधारण राजनेता और प्रशासक थीं जिन्होंने दिल्ली की शक्ल बदल दी. उनका यह भी कहना था कि शीला दीक्षित के कार्यकाल में कांग्रेस सबसे मजबूत थी और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उनकी मौत के बाद उन्हें दोष दिया जा रहा है. 15 साल दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित का बीते साल जुलाई में निधन हो गया था. इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि दिल्ली में कांग्रेस की हार की वजह शीला दीक्षित की टक्कर के किसी नेता का अभाव रहा.