जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले को आज एक साल हो गया. इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे. द हिंदू के मुताबिक मामले की जांच कर रही एनआईए अब तक यह पता नहीं लगा पाई है कि इस भयानक आतंकी हमले के लिए विस्फोटक कहां से आया था. विशेषज्ञों का कहना है कि हमले में 25 किलो विस्फोटक का इस्तेमाल हुआ था. अधिकारियों के मुताबिक इतना विस्फोटक किसी दुकान से नहीं खरीदा जा सकता.

इस हमले में एक आतंकी ने विस्फोटकों से भरी एक गाड़ी को सीआरपीएफ के काफिले से टकरा दिया था. धमाका इतना ज़ोरदार था कि एक बस के टुकड़े-टुकड़े हो गए थे. यह बस सीआरपीएफ की 54वीं बटालियन की थी. जैश-ए-मोहम्मद ने इस घटना की जिम्मेदारी ली थी. पुलवामा के रहने वाले आतंकवादी आदिल अहमद डार ने इस घटना को अंजाम दिया था.

पुलवामा हमले के बाद सुरक्षा में हुई चूक को लेकर भी गंभीर सवाल उठे थे. मसलन केंद्रीय पुलिस बल को बख्तरबंद गाड़ियां यानी आर्म्ड व्हीकल क्यों नहीं मुहैया कराई गई थीं? काफिले में लगभग 2500 जवान थे इसलिए यह सवाल भी था कि इतने सारे जवानों को एक साथ क्यों भेजा जा रहा था. कहा गया कि बर्फबारी से कुछ दिन हाईवे बंद होने के कारण सीआरपीएफ के जम्मू कैंप में कई जवान इकट्ठा हो गए थे. लेकिन फिर सवाल उठा कि इतनी तादाद में भेजने के बजाय उन्हें एयरलिफ्ट भी तो कराया जा सकता था. बाद में निर्देश जारी हुआ कि ऐसे हालात में यही किया जाए.

एनआई इस मामले में अब तक चार्जशीट भी दाख़िल नहीं कर सकी है. हमले के साज़िशकर्ता भी अब जिंदा नहीं हैं. दो मुख्य साज़िशकर्ताओं मुदासिर अहमद ख़ान और सज़्जाद भट को पुलिस ने पिछले साल मुठभेड़ में मार गिराया था. बीबीसी के मुताबिक इस मामले की प्रगति के बारे में पूछे जाने पर एनआईए का कहना था कि वाहन के मालिक से लेकर हमलावर की पहचान के अलावा, किस तरह का विस्फोटक इस्तेमाल किया गया था इसकी पहचान की गई है.