सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राजनीतिक दलों को अपने चुनावी उम्मीदवारों पर चल रहे आपराधिक मामलों की जिम्मेदारी अपनी वेबसाइटों और सोशल मीडिया पर डालनी होगी. साथ ही, उन्हें यह भी बताना होगा कि इन आरोपों को बावजूद उन्हें टिकट क्यों दिया गया. इस खबर को आज के सभी अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. अदालत के मुताबिक ऐसा न करना उसकी अवमानना माना जाएगा. इसके अलावा गृह मंत्री अमित शाह ने माना है कि दिल्ली चुनाव में भाजपा नेताओं को भड़काऊ बयानों से बचना चाहिए था. उनका यह बयान भी सभी अखबारों की प्रमुख सुर्खी है. अमित शाह ने कहा कि इसका पार्टी को नुकसान हुआ.

धर्मनिरपेक्ष सरकारें समय की जरूरत : प्रकाश सिंह बादल

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और शिरोमणि अकाली दल के संरक्षक प्रकाश सिंह बादल ने कहा है कि देश की मजबूती और विकास के लिए धर्मनिरपेक्ष सरकारें समय की जरूरत हैं. दैनिक जागरण के मुताबिक अमृतसर में एक रैली में उन्होंने कहा कि कोई भी राष्ट्र सिर्फ धर्मनिरपेक्ष सरकारों से ही सुरक्षित रह सकता है. प्रकाश सिंह बादल ने कहा, ‘ये गंभीर चिंता का विषय है कि देश में वर्तमान स्थिति इतनी अच्छी नहीं है. सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए. यदि कोई सरकार सफल होना चाहती है, तो उसे अल्पसंख्यकों को साथ लेना होगा. इसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी होने चाहिए. उन्हें ऐसा महसूस होना चाहिए कि वो सभी एक परिवार का हिस्सा हैं.’ उनके इस बयान को सहयोगी भाजपा के लिए नसीहत माना जा रहा है.

हार से चिंतित कांग्रेस मंथन करेगी

बीते साल हुए लोकसभा चुनाव और फिर दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस पार्टी नेतृत्व को लेकर मंथन करने वाली है. एशियन एज के मुताबिक राजस्थान के उदयपुर में कांग्रेस की कार्यकारी समिति की एक दिवसीय बैठक होने वाली है. इसमें पार्टी के नेतृत्व पर और पार्टी के संगठन में बदलाव करने के बारे में विचार किया जा सकता है. सूत्रों के मुताबिक यह बैठक संसद का बजट सत्र खत्म होने के बाद कभी भी हो सकती है. दिल्ली विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद कांग्रेस के भीतर घमासान है. नेता एक-दूसरे पर निशाने साध रहे हैं.

बीएसएनएल और एमटीएनएल के 93,000 कर्मचारियों ने एक साथ रिटायरमेंट मांगा

भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) और महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (एमटीएनएल) के 93,000 कर्मचारियों ने एक साथ रिटायरमेंट के लिए आवेदन दिया है. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक केंद्र ने इन दोनों कंपनियों के कर्मचारियों को वीआरएस की पेशकश की थी. आंकड़ों को देखें तो दोनों सरकारी उपक्रमों के 60 फीसदी से ज्यादा अधिकारी वीआरएस चाहते हैं. माना जा रहा है कि इस कवायद से इन कंपनियों का खर्च काफी कम होगा और सरकार को कंपनियों की मौजूदा संपत्ति को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने का मौका मिलेगा.