उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने गोरखपुर के डॉ कफील खान के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में भड़काऊ भाषण देने के मामले में राज्य पुलिस ने खान के खिलाफ रासुका यानी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत कार्रवाई की है.

बीते महीने एएमयू में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के मुद्दे पर भड़काऊ भाषण देने के मामले में डॉ कफील खान के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था. इसके बाद 29 जनवरी को उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स ने उन्हें मुंबई हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया था. अलीगढ़ में मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने के बाद उन्हें मथुरा जिला कारागार भेज दिया गया था.

एनडीटीवी के मुताबिक डॉक्टर कफील खान के वकील ने कोर्ट में उनकी जमानत की अर्जी डाली थी, जिस पर 10 फरवरी को सीजेएम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी. कोर्ट ने 60,000 रुपये के दो बांड के साथ सशर्त जमानत दी थी. साथ ही कहा था कि खान भविष्य में इस तरह की घटना को नहीं दोहराएंगे. लेकिन, जमानत के आदेश देर से पहुंचने के कारण उनकी गुरुवार को रिहाई नहीं हो पाई थी.

अगस्त 2017 में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 60 बच्चों की मौत के मामले में निलंबित किए जाने के बाद डॉक्टर कफील खान सुर्खियों में आए थे. हालांकि बाद में इस मामले में उनको क्लीन चिट दे दी गई थी.

क्या है राष्ट्रीय सुरक्षा कानून

रासुका यानी राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम-1980 देश की सुरक्षा के लिए सरकार को किसी व्यक्ति को हिरासत में रखने की शक्ति देता है. रासुका लगाकर किसी भी व्यक्ति को एक साल तक जेल में रखा जा सकता है. हालांकि तीन महीने से ज्यादा समय तक जेल में रखने के लिए एडवाइजरी बोर्ड की मंजूरी लेनी पड़ती है. राष्ट्र की सुरक्षा के लिए खतरा होने और कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के आधार पर रासुका लगाया जा सकता है.