पुलवामा हमले का एक साल पूरा होने के मौके पर भाजपा और कांग्रेस में हुए घमासान की खबर आज लगभग सभी अखबारों के पहले पन्ने पर है. पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक ट्वीट कर सवाल किया कि इस हमले से सबसे ज्यादा फायदा किसको हुआ. जवाब में भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि गांधी परिवार कभी फायदे से आगे की सोच ही नहीं सकता. इसके अलावा आदेश के बावजूद 1.33 लाख करोड़ रु का एजीआर बकाया भुगतान न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और टेलीकॉम कंपनियों को कड़ी फटकार लगाई. शीर्ष अदालत ने कहा कि क्या कोर्ट बंद कर दिया जाए. यह खबर भी सभी अखबारों की प्रमुख सुर्खी है.

दिल्ली-एनसीआर में अब 24 घंटे निर्माण कार्य हो सकेगा

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में शाम छह बजे से लेकर सुबह छह बजे तक निर्माण कार्य पर लगी रोक हटा दी है. दैनिक जागरण के मुताबिक न्यायमूर्ति अरुण मिश्र और दीपक गुप्ता की पीठ ने शुक्रवार को वायु प्रदूषण मामले में इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गेनाइजेशन (आइटीपीओ) की ओर से दाखिल अर्जी पर विचार करते हुए यह आदेश दिया है. कोर्ट ने ऐसा प्रदूषण की वर्तमान स्थिति और हवा की स्वच्छता को देखते हुए किया है. रोक का आदेश हटने के बाद धीमी गति से चल रहे निर्माण कार्य के रफ्तार पकड़ने की उम्मीद की जा रही है. इस आदेश का असर न सिर्फ प्रगति मैदान और चांदनी चौक में निर्माण पर पड़ेगा, बल्कि आवासीय और व्यावसायिक परियोजना बनाने में जुड़े बिल्डरों को भी राहत मिलेगी, जिनके निर्माण की समयसीमा बीती जा रही थी.

सीएए के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले को गद्दार या राष्ट्रद्रोही नहीं : बॉम्बे हाईकोर्ट

अगर कोई नए नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में प्रदर्शन करता है तो उसे गद्दार या राष्ट्रद्रोही नहीं कहा जा सकता. द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने यह बात कही है. अदालत ने महाराष्ट्र के बीड में विरोध प्रदर्शन की अनुमति के मामले में एडीएम के आदेश को पलटते हुए कहा है कि किसी को सिर्फ इसलिए राष्ट्रद्रोही नहीं कहा जा सकता क्योंकि वह किसी कानून का विरोध करना चाहता है. बीड में रहने वाले 45 वर्षीय इफ्तिख़ार शेख ने बीते महीने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने के लिए पुलिस से इजाज़त मांगी थी. लेकिन एडीएम के एक आदेश के हवाला देते हुए पुलिस ने उनकी अर्जी को खारिज कर दिया था. इसके बाद इफ्तिख़ार ने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया था.

ऑटोमेशन से भारत में नौ फीसदी नौकरियां जाने का खतरा

ऑटोमेशन यानी मशीनों से काम होने से भारत में करीब नौ फीसदी नौकरियां छिनने का खतरा पैदा हो गया है. हिंदुस्तान के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने यह बात कही है. हालांकि भारत के लिए एक राहत की बात यह है कि वैश्विक स्तर पर ऑटोमेशन से नौकरियां जाने की दर 14 फीसदी यानी 37.5 करोड़ है. आईएमएफ के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर डेविड लिप्टन ने कहा कि भारत अगले साल तक भारत छह से सात फीसदी विकास दर से आगे बढ़ सकता है. उन्होंने माना कि स्लोडाउन के बावजूद भारत का कारोबार बाकी देशों की तुलना में काफी चुस्त है.