सिविल सेवा से राजनीति में आए शाह फैसल पर जनसुरक्षा अधिनियम यानी पीएसए लगा दिया गया है. उन्हें बीते साल अगस्त में एहतियातन हिरासत में लिया गया था जिसकी अवधि खत्म हो रही थी. फैसल शाह 2010 में आईएएस परीक्षा के टॉपर रहे थे. बीते साल जनवरी में नौकरी से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने ‘जम्मू-कश्मीर पीपल्स मूवमेंट पार्टी’ का गठन किया था. पीएसए लगने के बाद फारुख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती जैसे नेताओं की सूची में उनका नाम भी जुड़ गया है.

पीएसए उन लोगों पर लगाया जा सकता है जिन्हें सुरक्षा और शांति के लिए खतरा माना जाता हो. 1978 में जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला ने इस कानून को लागू किया था. 2010 में इसमें संशोधन किया गया था जिसके तहत बगैर ट्रायल के ही कम से कम छह महीने तक किसी को भी हिरासत में रखा जा सकता है. राज्य सरकार चाहे तो इस अवधि को बढ़ाकर दो साल तक भी किया जा सकता है.

शाह फैसल को पिछले साल जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म होने के बाद दिल्ली एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया था. बताया जाता है कि वे इस्तांबुल जाने वाले थे. हिरासत में लिए जाने के बाद उन्हें वापस जम्मू-कश्मीर भिजवा दिया गया. फिलहाल वे श्रीनगर में हैं. शाह फैसल ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 के अधिकांश प्रावधानों को खत्म करने और इस राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने वाले सरकार के फैसले को गलत बताया था. साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि कश्मीर में अप्रत्याशित बंद चल रहा है और यहां के 80 लाख लोगों को कैद कर लिया गया है. उनका यह भी कहना था कि जम्मू-कश्मीर में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक अधिकारों की बहाली के लिए उन्होंने ‘राजनीतिक जन आंदोलन’ की भी जरूरत बताई थी.