1- दिल्ली के चुनाव नतीजों पर जिन लोगों की सबसे गहरी नज़र रही होगी, उनमें नीतीश कुमार का नाम शामिल है. बिहार के मुख्यमंत्री और उनकी पार्टी का बेशक दिल्ली के चुनाव में कोई खास दांव नहीं था, लेकिन इस चुनाव के नतीजे बिहार की राजनीति पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष असर डाल सकते हैं. दिल्ली के बाद देश में अगला बड़ा चुनाव बिहार में ही है. द प्रिंट हिंदी पर दिलीप मंडल की टिप्पणी

नीतीश कुमार को दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे से सीखना चाहिए

2-जलवायु परिवर्तन एक बड़ी समस्या बन चुका है. दुनिया भर में लोग इसे लेकर चिंतित हैं. कुछ लोग अपने-अपने स्तर पर इसे बचाने के लिए प्रयास कर भी रहे हैं और उनकी कोशिशों की सराहना भी हो रही है. लेकिन दूसरों की कोशिशों की तारीफ़ करने भर से काम चलने वाला नहीं है. हमें बेहतर भविष्य के लिए ना सिर्फ़ उम्मीद करनी है, बल्कि उसके लिए मिलकर कोशिश भी करनी होगी. बीबीसी पर डिएगो आर्गुडास ऑर्टिज़ का लेख.

क्या अच्छी-अच्छी बातें करके जलवायु परिवर्तन रोका जा सकता है?

3-मौसम की भविष्यवाणी आजकल इतनी सटीक हो गई है, जितनी पहले कभी नहीं थी. इसकी वजह धरती पर नजर रखने वाले सैटेलाइट हैं जो पूरी दुनिया में मौसम के लिए जरूरी सूचनाएं इकट्ठा करते रहते हैं. हाल में जब सबीने तूफान आया तो उसकी सटीक भविष्यवाणी समय रहते आ गई थी. लेकिन मौसमविज्ञानियों को डर है कि 5जी आने के बाद उनको मुश्किल हो सकती है. डॉयचे वैले पर फाबियान श्मिट का लेख.

क्या 5जी आने से मौसम की भविष्यवाणी पर होगा असर

4- 14 फरवरी को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी को एक साल हो गया. हमले में बिहार के रहने वाले दो सीआरपीएफ जवान भी शहीद हुए थे. हमले के एक साल बाद इनके परिजनों का कहना है कि शहादत के बाद सरकार की तरफ से बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन सारे कागज़ी निकले. द वायर हिंदी पर उमेश कुमार राय की रिपोर्ट.

सरकार से क्यों नाराज़ हैं पुलवामा हमले के शहीदों के परिवार

5- हाल में खबर आई कि अहमदाबार की एक सड़क के किनारे दीवार बनाई जा रही है ताकि जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वहां आए तो उन्हें उस जगह पर मौजूद झुग्गियां न दिखें. डोनाल्ड ट्रंप 24 फरवरी को भारत आ रहे हैं. एनडीटीवी खबर पर रवीश कुमार का सवाल है कि हम कब तक इन झुग्गियों को छिपाते रहेंगे.

ट्रंप से असलियत छुपाने की कोशिश क्यों?