राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि गांधी जी को जो परिस्थिति और समाज मिला तब उन्होंने उसके अनुसार सोचा, आज जो परिस्थिति है, उसमें उनके विचारों की कार्बन कॉपी नहीं कर सकते, लेकिन उनके विचार समझने और उन्हें अपने कामों में रचाने-बसाने की जरूरत है.
मोहन भागवत ने सोमवार को दिल्ली में जेएस राजपूत की पुस्तक ‘गांधी को समझने का यही समय’ के विमोचन के अवसर पर ये बातें कही. उन्होंने कहा, ‘गांधी जी को अपने हिंदू होने पर कभी लज्जा नहीं हुई. उन्होंने कई बार कहा कि मैं पक्का सनातनी हूं. सभी अपने-अपने धर्म को मानो और शांति से रहो, यही वो कहते थे. शुरू के दिनों में वे तकनीक के विरोधी थे लेकिन बाद में उसमें परिवर्तन कर लिया. 1920 में डॉ. हेडगवार ने कहा था कि गांधीजी के जीवन का अनुसरण करना चाहिए, सिर्फ स्मरण नहीं.’
अपने संबोधन में संघ प्रमुख ने महात्मा गांधी को निर्विवाद नेता भी बताया. उन्होंने कहा गांधी जी की सत्यनिष्ठा निर्विवाद है. जो उनका बड़ा विरोध करने वाला है वह भी उन पर सवाल नहीं उठा सकता. मोहन भागवत के मुताबिक गांधी जी भारत की आवाज थे. वह भारतीय दृष्टि के जीते-जागते उदाहरण थे. गांधी जी की सत्यनिष्ठा अविवादित है. कोई कितना भी विरोधी हो, वो उन्हें नकार नहीं सकता है.
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