नए नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के बीच देश भर में छिड़े बवाल के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि अगर एनआरसी लागू होता है तो यह सिर्फ हिंदुओं और मुस्लिमों को ही नहीं बल्कि आदिवासियों को भी प्रभावित करेगा. उद्धव ठाकरे का कहना था, ‘केंद्र सरकार ने अभी तक एनआरसी पर चर्चा नहीं की है.’ उन्होंने यह भी कहा कि दूसरी तरफ नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) जनगणना है जो हर 10 साल में होती है और उन्हें नहीं लगता कि इससे कोई प्रभावित होगा.

उद्धव ठाकरे पहले कह चुके हैं कि अगर केंद्र सरकार असम की तर्ज पर पूरे देश में एनआरसी की कवायद करती है तो वे महाराष्ट्र में इसे नहीं होने देंगे. हालांकि सीएए को लेकर उनका कहना है कि इससे किसी को परेशान होने की जरूरत नहीं है.

हालांकि महाराष्ट्र में जिन कांग्रेस और एनसीपी के साथ उद्धव ठाकरे ने सरकार बनाई है वे एनआरसी ही नहीं बल्कि सीएए के भी खिलाफ हैं. सीएए में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले गैरमुस्लिमों को आसानी से भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है. लेकिन इसका तीखा विरोध हो रहा है. बीते दिसंबर में देश के अलग-अलग हिस्सों में यह विरोध हिंसा में तब्दील हो गया जिसमें कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई. अभी भी दिल्ली के शाहीन बाग सहित देश के कई इलाकों में इस कानून के खिलाफ धरना-प्रदर्शन जारी है. खबरों के मुताबिक शिवसेना मुखिया के ताजा बयान पर एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा, ‘सीएम उद्धव ठाकरे का अपना मत है लेकिन एनसीपी के संदर्भ में मैं ये कहूंगा कि हमने सीएए के खिलाफ वोट किया था.’