सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने राम मंदिर न्यास को पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि राम मंदिर के लिए अधिगृहीत जमीन के चार-पांच एकड़ में कब्रिस्तान है. पत्र में राम मंदिर न्यास से अनुरोध किया गया है कि मंदिर निर्माण के दौरान इस कब्रिस्तान की जमीन को छोड़ देना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एमआर शमशाद ने यह पत्र अयोध्या के नौ मुस्लिम नागरिकों की ओर से लिखा है. पत्र में राम मंदिर जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के सभी 10 न्यासियों को संबोधित करते हुए कहा गया है कि मुस्लिमों के मुताबिक बाबरी मस्जिद वाले इलाके में ‘गंज शहीदान’ नाम का एक कब्रिस्तान है. पत्र में यह भी कहा गया है कि केंद्र सरकार ने भी राम मंदिर निर्माण के लिए मुस्लिमों के कब्रिस्तान का इस्तेमाल नहीं करने के मुद्दे पर विचार नहीं किया, इससे ‘धर्म’ का उल्लंघन हुआ है.

पत्र में यह सवाल भी उठाया गया है कि क्या सनातन धर्म के अनुसार राम मंदिर की बुनियाद मुस्लिमों की कब्रों पर रखी जा सकती है? पत्र में एमआर शमशाद की ओर से कहा गया है, ‘भगवान राम के प्रति पूरे सम्मान और विनम्रता के साथ मैं अनुरोध करता हूं कि ढहाई गई मस्जिद के निकट की करीब चार से पांच एकड़ की उस जमीन का इस्तेमाल मंदिर निर्माण के लिए नहीं किया जाए जहां मुस्लिमों की कब्रें हैं.’ हालांकि, अयोध्या के जिला प्रशासन ने इस दावे का खंडन किया है. जिला प्रशासन का कहना है कि अधिगृहीत क्षेत्र में कोई कब्रिस्तान नहीं है.