नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में राजनीति और तेज हो गई है. सीएए के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के नेता वारिस पठान ने एक बेहद भड़काऊ बयान दिया है. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के नेता और प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा है कि इस देश के 15 करोड़ मुसलमान 100 करोड़ लोगों पर भारी हैं.

न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक कर्नाटक के गुलबर्गा में जनसभा को संबोधित करते हुए वारिस पठान ने कहा, ‘हमने ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख लिया है. मगर हमको इकट्ठा होकर चलना पड़ेगा. आजादी लेनी पड़ेगी और जो चीज मांगने से नहीं मिलती है, उसको छीन लिया जाता है. हमको कहा जा रहा है कि हमने अपनी मां और बहनों को आगे भेज दिया है. हम कहते हैं कि अभी सिर्फ शेरनियां बाहर निकली हैं, तो आपके पसीने छूट गए. अगर हम सब साथ में आ गए, तो सोच लो क्या होगा. हम 15 करोड़ ही 100 करोड़ लोगों पर भारी हैं. यह बात याद रख लेना.’

वारिस पठान के इस बयान पर जब विवाद बढ़ा तो उन्होंने इस पर सफाई भी दी, लेकिन माफी मांगने से इनकार कर दिया. उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘मैंने देश और किसी धर्म के खिलाफ कुछ भी नहीं कहा है. सीएए के खिलाफ हर धर्म के लोग प्रदर्शन कर रहे हैं. बीजेपी के नेता तो गोली मारने की बात तक कहते हैं. बीजेपी देश के लोगों को अलग करना चाहती है. यह लोगों को समझना जरूरी है. मैं अपने बयान पर माफी नहीं मांगूंगा.’

इससे पहले 5 फरवरी को पठान ने स्‍वीकार किया था कि उन्‍होंने मुंबई के नागपाड़ा इलाके में शाहीन बाग की तरह से विरोध प्रदर्शन आयोजित किया था. वारिस पठान के इस बयान के बाद राजनीति गरम हो गई है. वीएचपी ने वारिस पठान के बयान की आलोचना की है. उधर, मुस्लिम मौलवियों ने भी वारिस पठान के इस बयान की आलोचना की है. उन्‍होंने कहा कि इस तरह के बयान घृणा को जन्‍म देते हैं.