मध्य प्रदेश सरकार ने नसबंदी को लेकर अपने एक फरमान पर विवाद होने के बाद इसे वापस ले लिया है. इसमें नसबंदी के टारगेट पूरे न होने पर कर्मचारियों को वेतन कटौती और वीआरएस की चेतावनी दी गई थी. इस आदेश को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के राज्य निदेशक ने जारी किया था. इसमें कहा गया था कि मिशन के कर्मचारियों के लिए हर साल पांच से 10 लोगों की नसबंदी करवाना अनिवार्य होगा. आदेश में नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 की रिपोर्ट का हवाला दिया गया था जिसमें कहा गया था कि मध्य प्रदेश में नसबंदी करवाने वाले पुरुषों की तादाद घट गई है.

विपक्षी भाजपा ने इस आदेश की आलोचना की थी. उसने मुख्यमंत्री कमलनाथ पर निशाना साधते हुए उन्हें 1975 के आपातकाल की याद दिलाई थी. विवाद होने पर कांग्रेस सरकार ने यह आदेश रद्द कर दिया. एक अधिकारी के मुताबिक यह मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में आने पर उन्होंने तुरंत कार्रवाई की. मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा कि किसी को नसबंदी के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा और न ही किसी की नौकरी जाएगी.