1- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के लिए की जा रही तैयारियों की चर्चा हर तरफ है. 42 साल पहले तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर भी अपनी पत्नी रोजलिन कार्टर के साथ भारत आए थे. इस दौरान उन्होंने हरियाणा के एक गांव का दौरा भी किया था. इसके बाद इस गांव का नाम ही कार्टरपुरी पड़ गया. इस चर्चित यात्रा की यादें गांव के लोगों के ज़हन में आज भी हैं. बीबीसी पर ओंकार करमबेलकर की रिपोर्ट

अमरीकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर जब पत्नी संग हरियाणवी रंग में रंग गए थे

2- उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में नवजात बच्चों की मौत का मामला ज्यादा पुराना नहीं हुआ. हाल में सीएजी की एक रिपोर्ट में भी उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों के कामकाज को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने न तो केंद्र सरकार के मानदंडों को अपनाया है और न ही उसने अपने मानदंड तय किए हैं. इंडियास्पेंड हिंदी पर आदित्य ओझा और सौरभ शर्मा की रिपोर्ट

क्यों बदहाल हैं उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पताल

3- 2019 के लोकसभा चुनाव में एक जबरदस्त बहुमत के साथ जीत दर्ज करने के बाद भारतीय जनता पार्टी को एक के बाद चार राज्यों में हार का सामना करना पड़ा है. दिल्ली इस सिलसिले की सबसे नई कड़ी है. इन चारों राज्यों में चले चुनाव अभियान में भाजपा का एक ही फॉर्मूला था- राष्ट्रवाद, हिंदुत्व और मुसलमानों के खिलाफ नफरत भड़काने का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल. तो क्या इस असफलता के बाद भाजपा अपने प्रचार के तरीके में बदलाव करेगी? द वायर हिंदी पर सिद्धार्थ भाटिया मानते हैं कि ऐसा नहीं होगा.

चुनावों में हुई हार संघ के हिंदुत्व अभियान की आग को और हवा देगी

4- किसानों के लिए बीमा योजनाओं में केंद्र सरकार ने कई बदलाव किये हैं. नए नियमों के अनुसार इन योजनाओं के तहत केंद्रीय सब्सिडी की सीमा बिना सिंचाई वाली फसलों के लिए 30 और सिंचाई वाली फसलों के लिए 25 प्रतिशत तय कर दी गई है. इन बदलावों को बारीकी से देखने के बाद कृषि अर्थव्यवस्था के विशेषज्ञों ने निराशा जाहिर की है. डॉयचे वेले की रिपोर्ट.

क्या सरकार ने किसानों का साथ छोड़ दिया है?

5- सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस के बर्ताव पर लगातार सवाल खड़े होते रहे हैं. जामिया में लाठीचार्ज से लेकर जेएनयू में नकाबपोशों के हमले की जांच तक एक वर्ग उसे लगातार घेरता रहा है. दिल्ली पुलिस की छवि आज भले ही अच्छी नहीं है, लेकिन उसका इतिहास सुनहरा रहा है. द प्रिंट हिंदी पर इंद्र वशिष्ठ की टिप्पणी

जवाहर लाल नेहरू के दादा गंगाधर दिल्ली के आखिरी कोतवाल थे