सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अयोध्या में मस्जिद निर्माण के लिए राज्य सरकार द्वारा दी गई जमीन के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है. लखनऊ में हुई सुन्नी वक्फ बोर्ड की बैठक में यह फैसला लिया गया है.

सुन्नी वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जफर अहमद फारुकी ने जानकारी दी कि आवंटित जमीन पर एक मस्जिद के साथ ही एक ऐसा केंद्र बनाया जाएगा जो कि इंडो इस्लामिक सभ्यता का प्रदर्शन करेगा. इसके साथ ही एक धर्मार्थ अस्पताल और सार्वजनिक पुस्तकालय का निर्माण किया जाएगा.

करीब ढाई घंटे तक चली सुन्नी वक्फ बोर्ड की बैठक में आठ में से छह सदस्य मौजूद रहे जबकि दो सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार किया. बोर्ड के दो सदस्य अब्दुल रज्जाक और इमरान माबूद ने मीटिंग का बहिष्कार करते हुए सरकारी जमीन लेने का विरोध किया है. उनका कहना है कि शरीयत मस्जिद के बदले कुछ भी लेने की इजाजत नही देती.

अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या के धन्नीपुर गांव में मस्जिद के लिए पांच एकड़ भूमि का आवंटन किया था. मुस्लिम पक्ष में इस बात पर मतभेद था कि मस्जिद के लिए आवंटित जमीन ली जाए या नहीं.