निर्भया मामले के दोषियों को अलग-अलग फांसी देने की मांग करती केंद्र की याचिका पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने पांच मार्च तक टाल दी है. जस्टिस आर भानुमति, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने यह फैसला किया. जस्टिस भानुमति के अवकाश पर होने के कारण पिछले हफ्ते इस मामले पर सुनवाई नहीं हो पाई थी.

इस मामले के चार में से तीन दोषियों के सभी कानूनी विकल्प खत्म हो चुके हैं. सिर्फ एक दोषी के पास सुधारात्मक और उसके बाद दया याचिका का विकल्प बचा है. पांच मार्च को दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा था कि दोषियों के पास जो भी कानूनी विकल्प हैं उनका इस्तेमाल एक हफ्ते के भीतर कर लिया जाए. ऐसे में दोषियों की तीन मार्च को फांसी लगभग तय मानी जा रही है. चारों के खिलाफ डेथ वारंट जारी हो चुका है. दिल्ली की तिहाड़ जेल का प्रशासन फांसी की तैयारियों में जुट गया है. अधिकारियों ने दोषियों को एक नोटिस भेजकर पूछा है कि क्या वे आखिरी बार अपने परिवार से मिलना चाहते हैं और अगर हां तो कब.

16 दिसंबर, 2012 की रात को दक्षिण दिल्ली में एक चलती बस में 23 साल की पैरामेडिकल छात्रा निर्भया के साथ सामूहिक बलात्कार और बर्बरता की गयी थी. उसी महीने सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी थी.