अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो दिनों की भारत यात्रा पर सोमवार को अहमदाबाद पहुंचे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनके साथ मौजूद रहे. यहां दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम में उन्होंने एक लाख से अधिक लोगों को संबोधित किया. इसके बाद वे ताजमहल देखने आगरा पहुंचे. डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में भारत और अमेरिका के बीच वार्ता का दौर मंगलवार को नई दिल्ली में चला. इनमें दोनों देशों के बीच कुछ समझौते भी हुए.

डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा शुरू होने के पहले से ही ये कयास लगाए जा रहे थे कि वे इस साल अमेरिका में होने वाले राष्ट्रपति चुनावों में अपनी दावेदारी को मजबूत करने के मकसद से भारत के दौरे पर आ रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ने अहमदाबाद में जो बोला, उससे ऐसा लगा भी कि भले ही अमेरिका के लिए आर्थिक और सामरिक लिहाज से भारत महत्वपूर्ण हो लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के लिए चुनावी लिहाज से नरेंद्र मोदी इससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं.

अमेरिका में 40 लाख से ज्यादा भारतीय रहते हैं. पिछले साल सितंबर में वहां रह रहे भारतीयों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप ने साथ में ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम के तहत संबोधित किया था. उसी कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी ने ‘अबकी बार, ट्रंप सरकार’ का नारा दिया था. हालांकि, इस नारे के लिए उनकी यह कहते हुए काफी आलोचना की गई थी कि अमेरिका की आंतरिक राजनीति में उन्हें किसी के प्रति झुकाव नहीं दिखाना चाहिए. इससे अमेरिका की विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के लोग भारत से नाराज हो सकते हैं. ‘हाउडी मोदी’ की सफलता, उसमें नरेंद्र मोदी का व्यवहार और कार्यक्रम में शामिल लोगों का भारतीय प्रधानमंत्री के प्रति उत्साह ऐसा था कि डोनाल्ड ट्रंप का इसमें राजनीतिक संभावनाएं तलाशना स्वाभाविक था.

सोमवार को मोटेरा स्टेडियम में जिस तरह से डोनाल्ड ट्रंप ने नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की, उसे अमेरिका में रह रहे 40 लाख भारतीयों को अपने पाले में लाने की उनकी कोशिश के तौर पर ही देखा जा रहा है. अहमदाबाद में अमेरिकी राष्ट्रपति ने न सिर्फ व्यक्तिगत तौर पर नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की और उन्हें अपना खास दोस्त बताया बल्कि उन्होंने मोदी सरकार की योजनाओं की भी जमकर तारीफ की. ट्रंप ने अहमदाबाद में जो भाषण दिया, उसे सुनकर कुछ लोगों को भारतीय राष्ट्रपति के उस अभिभाषण की याद आ रही थी जिसे वे हर साल संसद में देते हैं. इसमें वे सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हैं. डोनाल्ड ट्रंप भी बिलकुल उसी अंदाज में एक के बाद एक मोदी सरकार की उपलब्धियों को गिनाते दिखे.

माना जा रहा है कि ऐसा करके ट्रंप अमेरिका में रहने वाले भारतीय लोगों को अपने पाले में करने की योजना को अमली रूप दे रहे थे. डोनाल्ड ट्रंप को ऐसा लगता है कि लगातार दूसरी बार चुनाव जीतकर भारत के प्रधानमंत्री बनने वाले नरेंद्र मोदी का प्रभाव सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि अमेरिका में रह रहे भारतीय लोगों पर भी है और बहुत ज्यादा है. ऐसे में अगर अमेरिका में रहने वाले भारतीयों में यह संदेश जाता है कि डोनाल्ड ट्रंप उनके बेहद करीब हैं तो वे लोग इस साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप का साथ दे सकते हैं.

अमेरिका में रहने वाले भारतीयों में बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो कॉरपोरेट जगत और अन्य क्षेत्रों में खासे प्रभावी हैं. ये ऐसे लोग हैं जो अमेरिका में चुनावों को अपने ढंग से प्रभावित करने की स्थिति में आ गए हैं. इनका प्रभाव चुनावों के लिए संसाधन जुटाने से लेकर प्रचार अभियान चलाने और उसके बाद सरकार चलाने तक में है. यह भी एक बड़ी वजह है कि डोनाल्ड ट्रंप को नरेंद्र मोदी आज बेहद महत्वपूर्ण दिखते हैं.

डोनाल्ड ट्रंप से पहले किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने चुनावी साल में भारत की यात्रा नहीं की. इसकी एक वजह तो यह बताई जा सकती है कि अमेरिका में रह रहे भारतीय आज जितना प्रभाव रखते हैं वैसा पहले नहीं था. लेकिन इसकी एक दूसरी अहम वजह यह हो सकती है कि नरेंद्र मोदी से पहले हाल के कुछ दशकों में भारत में ऐसे प्रधानमंत्री नहीं रहे जिनके लिए ऐसा सोचा जा सके कि उनकी एक अपील पर अमेरिका में रह रहे भारतीय किसी का भी साथ दे और छोड़ सकते हैं. लेकिन मोदी के बारे में यह धारणा है कि वे अगर अपना झुकाव किसी देश के किसी खास नेता की ओर दिखाते हैं तो वहां रहने वाले भारतीय भी उस नेता का साथ दे सकते हैं.

चुनावी साल में डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा की एक और वजह उनकी राजनीति का अलहदा तरीका भी है. अमेरिका में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में उन्होंने एक ऐसे नेता की पहचान बनाई है जो राजनीति के पारंपरिक कायदों के हिसाब से नहीं चलता. वे अपने हिसाब से राजनीति करते हैं. उन्हें बहुत गंभीर नेता नहीं माना जाता. ट्रंप के बारे में यह माना जाता है कि अपने फायदे के लिए वे कूटनीति और राजनीति की पारंपरिक मर्यादाओं को दरकिनार करते रहते हैं. इसी अंदाज में राजनीति करते हुए उन्होंने 2016 में अमेरिका के राष्ट्रपति चुनावों में जीत हासिल की थी. और उसी अनोखे अंदाज में वे इस बार का राष्ट्रपति चुनाव जीतने की जुगत में लगे हुए हैं. करने वाले इसकी आलोचना कर रहे हैं लेकिन उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता.