दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस एस मुरलीधर का तबादला पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में कर दिया गया है. जस्टिस मुरलीधर वही जज हैं जिन्होंने कल दिल्ली में हुई हिंसा पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई थी. उन्होंने भाजपा नेताओं कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा सहित भड़काऊ बयान देने के आरोपित सभी लोगों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश भी दिया था. इस हिंसा में मरने वालों का आंकड़ा 27 हो चुका है.

जस्टिस मुरलीधर ने दिल्ली में भड़की हिंसा और पीड़ितों के इलाज को लेकर मंगलवार देर रात अपने घर में भी सुनवाई की थी. उन्होंने दिल्ली पुलिस को आदेश दिया था कि वह घायलों के इलाज के लिए उन्हें प्रभावित इलाकों के छोटे अस्पतालों से दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए उचित सुरक्षा व्यवस्था मुहैय्या करवाए.

खबरों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने बीती 12 फरवरी को जस्टिस एस मुरलीधर के तबादले को लेकर सुझाव दिया था. बुधवार को इससे संबंधित नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है. इसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे के साथ विचार-विमर्श करने के बाद यह निर्णय लिया है.

कॉलेजियम की सिफारिश के बाद दिल्ली हाई कोर्ट की बार एसोसिएशन ने 20 फरवरी को इसके खिलाफ हड़ताल की थी. उसने एक प्रस्ताव पारित करके जस्टिस मुरलीधर के तबादले का विरोध किया था. उसका कहना था कि एक वरिष्ठ जज का तबादला जिस तरह किया जा रहा है वह अनुचित है. बीबीसी के मुताबिक बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहित माथुर का कहना था, ‘दिल्ली हाईकोर्ट में वरिष्ठता के मामले में जस्टिस मुरलीधर तीसरे नंबर पर हैं. इतने वरिष्ठ जज का ट्रांसफ़र जब होता है तो आप उन्हें किसी राज्य में चीफ जस्टिस बनाकर भेजें. लेकिन आप उन्हें दूसरे राज्य में भी इसी पद पर भेज रहे हैं.’

कांग्रेस ने भी जस्टिस मुरलीधर के तबादले पर केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया है. पार्टी नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि जैसे ही जस्टिस मुरलीधर की अगुवाई वाली पीठ ने बीजेपी नेताओं और सरकार को दिल्ली में हो रही हिंसा के लिए ज़िम्मेदार ठहराया गया वैसे ही रात भर में दिल्ली हाई कोर्ट से उनका तबादला कर दिया गया. उन्होंने ट्वीट किया, ‘काश इस मुस्तैदी से दंगाइयों को पकड़ा होता.’