1-बीते दिनों दिल्ली सरकार ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार पर राजद्रोह केस में मुक़दमा चलाने की मंजूरी दे दी. इसके बाद से एक वर्ग दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आलोचना कर रहा है. इस मुद्दे की पड़ताल करती बीबीसी पर विभुराज चौधरी की रिपोर्ट

कन्हैया कुमार पर राजद्रोह केस केजरीवाल रोक सकते थे?

2-बीते हफ्ते दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाकों में हुई हिंसा में 42 लोगों की मौत हो गई. इसे लेकर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं. द वायर में छपे अपने इस लेख में अपूर्वानंद मानते हैं कि इस हिंसा की तैयारी में प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, दूसरे केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा के नेताओं के प्रत्यक्ष और परोक्ष मुसलमान विरोधी उकसावे की भूमिका है.

दिल्ली हिंसा के ज़िम्मेदार सत्ता के शीर्ष पर बैठे हैं

3-उधर, द प्रिंट हिंदी पर अपने इस लेख में योगेंद्र यादव का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह बात एक पल भी गवारा नहीं हो सकती कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के दौरे पर हों और उसी वक्त दिल्ली की सड़कों पर हिंसा का तांडव हो. जहां तक उनके विरोधियों का सवाल है, वे इस हालत मे थे ही नहीं कि हिंसा की कोई साजिश रचें और उसे अमली जामा पहनायें. तो फिर यह हिंसा कैसे हो गई?

दिल्ली हिंसा न तो मोदी सरकार का डिजाइन है और न ही इस्लामिक साजिश, यह इससे अधिक खतरनाक है

4-दिल्ली में हुई हिंसा जिस तरह से तीन तक चलती रही वह असाधारण था. सरकार के तमाम दावों के बावजूद पथराव और आगजनी की खबरें लगातार आती रहीं और साथ ही, मरने वालों का आंकड़ा भी निरंतर बढ़ता रहा. हिंसा कैसे हुई, इस पर दैनिक भास्कर में राहुल कोटियाल का आंखों देखा हाल.

सड़कों पर नफरत

5-अफगानिस्तान में शांति के लिए अमेरिका और तालिबान ने शनिवार को कतर में एक ऐतिहासिक समझौते पर दस्तखत किए. समझौते में अमेरिका ने कहा है कि अगर तालिबान शांति समझौते का पालन करता है तो अमेरिकी सेनाएं 14 महीने के भीतर अफगानिस्तान छोड़ देंगी. इस समझौते के दौरान भारत का एक प्रतिनिधि भी मौजूद था जो पहली बार हुआ. इस मुद्दे से जुड़ी डॉयचे वेले पर चारु कार्तिकेय की रिपोर्ट.

क्या अमेरिका-तालिबान संधि भारत के हित में है?