संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) पर सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर की है. इसमें उसने अनुरोध किया है कि शीर्ष अदालत में चल रहे इस मामले में उसे भी एक पक्ष बनाया जाए. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने यह जानकारी दी. खबरों के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘जिनेवा में हमारे स्थायी दूतावास को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने सूचित किया कि उनके कार्यालय ने सीएए के संबंध में भारत के उच्चतम न्यायालय में हस्तक्षेप याचिका दाखिल की है.’

ऐसा पहली बार हुआ है जब यूएनएचआरसी ने भारत से जुड़े किसी कानून के खिलाफ उसकी शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है. इसे सीएए को लेकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश माना जा रहा है. विदेश मंत्रालय ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. रवीश कुमार ने कहा, “हमारा स्पष्ट रूप से यह मानना है कि भारत की संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर किसी विदेशी पक्ष का कोई अधिकार नहीं बनता.’ उनके मुताबिक भारत का रुख साफ है कि सीएए संवैधानिक रूप से वैध है

वहीं, दूसरी ओर भारत ने मंगलवार को ईरान के राजदूत अली चेगेनी को तलब किया और दिल्ली हिंसा के बारे में ईरानी विदेश मंत्री जवाद जरीफ द्वारा की टिप्पणी पर कड़ा विरोध जताया. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक ईरानी राजदूत को यह बताया गया कि जिस मामले पर यह टिप्पणी हुई वह पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है. जवाद जरीफ ने सोमवार को एक ट्वीट में इसे भारतीय मुस्लिमों के खिलाफ संगठित रूप से की गई हिंसा कहा था.