कांग्रेस के महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया है. उन्होंने मंगलवार को ट्विटर के ज़रिए अपना त्यागपत्र सार्वजनिक किया. ज्योतिरादित्य सिंधिया 2018 में मध्यप्रदेश में अपनी जगह कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाए जाने के चलते पार्टी से नाराज़ थे. सूत्रों का कहना है कि उन्होंने अपना त्यागपत्र सोमवार को ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भेज दिया था. सिंधिया के इस्तीफ़े पर भी तारीख़ 9 मार्च ही लिखी है.

कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के नाम लिखे अपने त्यागपत्र में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लिखा है, ‘मैं 18 वर्षों से कांग्रेस का प्राथमिक सदस्य रहा हूं, लेकिन अब राह अलग करने का वक्त आ गया है… शुरुआत से ही मेरा उद्देश्य अपने राज्य और देश की जनता की सेवा करना था, लेकिन कांग्रेस में रहते हुए ऐसा कर पाना मुश्किल साबित हो रहा था…अब मुझे आगे बढ़ने की ज़रूरत है.’

इस्तीफ़ा देने से पहले सिंधिया ने मंगलवार सुबह गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी जो करीब एक घंटे तक चली थी.

जानकारों के अनुसार ज्योतिरादित्य सिंधिया औपचारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में कभी भी शामिल हो सकते हैं. संभावना जताई जा रही है कि भाजपा पारितोषिक के तौर पर सिंधिया को पहले राज्यसभा भेजेगी और बाद में उन्हें केंद्रीय कैबिनेट में भी शामिल किया जाएगा.

सिंधिया के इस्तीफ़े के बाद मध्यप्रदेश सरकार के पांच मंत्रियों समेत 19 विधायकों ने भी कांग्रेस का दामन छोड़ दिया है. विश्लेषकों के मुताबिक इस पूरी उठापटक के बाद मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने का रास्ता साफ़ हो गया है.

अभी मध्यप्रदेश विधानसभा में 230 सीटें हैं जिनमें से दो सीटें विधायकों के निधन की वजह से ख़ाली हैं. इस तरह वहां 228 में से बहुमत के लिए 115 विधायक होना ज़रूरी है. अभी मध्यप्रदेश में कांग्रेस के पास 114 विधायक थे और उसे 4 निर्दलीय, 2 बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और एक समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक का समर्थन हासिल है. कांग्रेस के विधायकों के इस्तीफ़े के बाद मध्यप्रदेश विधानसभा में सदस्यों की संख्या 209 रह गई है और बहुमत का आंकड़ा 105 हो गया है. अब कांग्रेस के पास केवल 95 विधायक रह गए हैं और भाजपा के पास 107 विधायक हैं.

सूत्रों के अनुसार मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार बनने की स्थिति में ज्योतिरादित्य सिंधिया के खेमे के किसी नेता को उपमुख्यमंत्री और अन्य कुछ प्रमुख नेताओं को मंत्री बनाया जा सकता है. उधर, ज्योतिरादित्य सिंधिया का त्यागपत्र सार्वजनिक होने के बाद कांग्रेस ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में निष्कासित कर दिया है. कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी उनके फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है.