कांग्रेस छोड़ चुके ज्योतिरादित्य सिंधिया आज भाजपा का दामन थाम सकते हैं. कहा जा रहा है कि उन्हें राज्य सभा भेजा जाएगा और इसके बाद केंद्रीय कैबिनेट में जगह भी दी जाएगी.

ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफे के साथ ही मध्य प्रदेश में कांग्रेस सत्ता गंवाने के कगार पर पहुंच गई है क्योंकि 21 विधायक उनके साथ हैं. मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार के पास 116 विधायकों का समर्थन है जो बहुमत के आंकड़े से सिर्फ चार ज्यादा है. अगर सिंधिया समर्थक विधायकों के इस्तीफे स्वीकार हो जाते हैं तो सरकार गिर जाएगी.

यही वजह है कि अपना खेमा बचाने के लिए मध्य प्रदेश में रिजॉर्ट राजनीति शुरू हो गई है. भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने विधायकों को राज्य से बाहर भेज दिया है. भाजपा के विधायक हरियाणा के गुरुग्राम स्थित एक पांच सितारा होटल में रुके हैं. उधर, कांग्रेस ने अपने विधायकों को अपनी सत्ता वाले राजस्थान की राजधानी जयपुर में भेज दिया है.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दावा किया है कि उनकी सरकार को कोई खतरा नहीं है. उनका कहना था, ‘चिंता की कोई बात नहीं. हम बहुमत साबित करेंगे.’

माना जा रहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया पार्टी में अपनी उपेक्षा से नाराज थे. हालांकि, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इससे इनकार किया है. उनका कहना था, ‘ऐसी कोई बात नहीं थी. उनकी बिल्कुल भी उपेक्षा नहीं हो रही थी..अफसोस की बात है. लेकिन मैं उन्हें मोदी-शाह की संगत के लिए शुभकामनाएं देता हूं.’